दलित युवकों की शिकायत पर मुकदमा, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का लगाया आरोप; BNS की धाराओं के साथ SC/ST एक्ट में कार्रवाई
हल्द्वानी। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता सदन मल्लिकार्जुन खड़गे से जुड़े कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद ने अब नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है। मामले में दलित युवकों की शिकायत के आधार पर कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने अनुसूचित जाति के संबंध में कथित तौर पर आपत्तिजनक एवं जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।
पुलिस के मुताबिक, मामले में अमित कुमार की तहरीर के आधार पर FIR संख्या 297/2026 दर्ज की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 और 299 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(q) के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं। हालांकि, लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में होना है।

दो युवकों ने दी थी तहरीर
जानकारी के अनुसार, रामलीला मैदान में आयोजित कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में शामिल रहे विनोद आर्य और अमित कुमार की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई थी। शिकायतकर्ताओं को शुद्धिकरण कार्यक्रम से जुड़े न्यास का सदस्य बताया जा रहा है। तहरीर में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी की ओर से अनुसूचित जाति को लेकर ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें शिकायतकर्ताओं ने जातिसूचक एवं आपत्तिजनक बताया।
शिकायत में पूरे मामले की जांच कर राहुल गांधी के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की गई थी। इसके बाद पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया।

‘शुद्धिकरण’ कार्यक्रम पर पहले से गरमाया हुआ है विवाद
रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। कांग्रेस ने इस घटना को दलित सम्मान, संविधान और सामाजिक समानता से जोड़ते हुए भाजपा और आरएसएस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि यदि किसी दलित नेता के कार्यक्रम के बाद मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया गया, तो यह केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ मानसिकता को दर्शाता है। पार्टी की ओर से इस मामले में कार्रवाई की मांग भी उठाई गई थी।

कांग्रेस ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कथित शुद्धिकरण प्रकरण को लेकर संसद में भी मामला उठाया गया था और जांच तथा कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था। कांग्रेस का दावा है कि घटना के कई सप्ताह बीतने के बावजूद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
अब राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक दबाव और आवाज दबाने की कोशिश के रूप में देखना शुरू कर दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक ओर दलित सम्मान से जुड़े कथित मामले में कार्रवाई लंबित है, जबकि दूसरी ओर राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
भाजपा-आरएसएस पर कांग्रेस का तीखा हमला
कांग्रेस की ओर से भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि “डराने, धमकाने और FIR के सहारे विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता।” पार्टी ने इसे संविधान, सामाजिक न्याय और समानता की लड़ाई से जोड़ते हुए कहा कि वह इस मुद्दे को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाएगी।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा का रवैया दलितों के प्रति दोहरे चरित्र को दर्शाता है। वहीं, भाजपा की ओर से इस मामले में क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है और पुलिस जांच में आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं, यह आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगा।
FIR के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज होने से उत्तराखंड की राजनीति में भी हलचल तेज होने के आसार हैं। कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास बता रही है, जबकि शिकायतकर्ताओं ने इसे अनुसूचित जाति के सम्मान से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
अब पूरे मामले में पुलिस जांच, शिकायत में लगाए गए आरोपों के साक्ष्य, कथित बयान की वास्तविक परिस्थितियां और कानूनी धाराओं के तहत आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
महत्वपूर्ण: राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायत/FIR में दर्ज आरोप हैं। FIR दर्ज होना आरोप सिद्ध होना नहीं है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
दून वैली टाइम्स | संपादकीय सवाल
क्या हल्द्वानी के ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर निष्पक्ष जांच होगी? क्या राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाएंगे? और यदि दलित सम्मान से जुड़े आरोप सही हैं, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?
मामला अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर कानूनी जांच के दायरे में पहुंच चुका है।
