देहरादून। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने 1.47 करोड़ रुपये की चर्चित ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए चौथे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की गिरफ्तारी हरियाणा के अंबाला जिले से की गई है।

एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह मामला वर्ष 2025 में दर्ज हुआ था। नैनीताल निवासी रूहेलखंड विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त कुलपति को साइबर अपराधियों ने स्वयं को महाराष्ट्र साइबर क्राइम का अधिकारी बताकर अपने जाल में फंसा लिया।
ठगों ने महिला को बताया कि उनके नाम पर खुले बैंक खाते से 60 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग हुई है और जांच के नाम पर उन्हें लगातार व्हाट्सएप कॉल पर रखा गया। साइबर अपराधियों ने करीब 12 दिनों तक उन्हें तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ की स्थिति में रखकर मानसिक दबाव बनाया और ऑनलाइन सत्यापन का झांसा देकर विभिन्न बैंक खातों में कुल 1.47 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।
मामले की जांच के दौरान एसटीएफ ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों और लगातार निगरानी के आधार पर हरियाणा के अंबाला जिले के शाह थाना क्षेत्र के ग्राम पिलखनी निवासी भूपिंदर सिंह (41 वर्ष) को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी से प्राप्त 50 लाख रुपये आरोपी के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे।
एसटीएफ के अनुसार, इस मामले में इससे पहले तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चौथे आरोपी की गिरफ्तारी से साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा होने की उम्मीद बढ़ गई है। पुलिस अब इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है।
एसटीएफ की अपील
उत्तराखंड एसटीएफ ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी, साइबर क्राइम या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल या व्हाट्सएप कॉल पर डराने-धमकाने की कोशिश करे तो घबराएं नहीं। किसी भी स्थिति में पैसे ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।




