साहिया में बिजली बिलों के खिलाफ ग्रामीणों का बिगुल, 27 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम

बढ़ी हुई रीडिंग पर ‘जीरो प्लान’ से समाधान की मांग, उच्च अधिकारियों को सहिया में बैठक के लिए बुलाने पर अड़े उपभोक्ता

दून वैली टाइम्स | साहिया (देहरादून)

साहिया और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के बढ़े हुए बिलों को लेकर उपभोक्ताओं का आक्रोश तेज हो गया है। बिजली बिलों में कथित तौर पर असामान्य बढ़ोतरी से परेशान ग्रामीणों ने विभाग से जवाबदेही तय करने और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग उठाई है। भीम दत्त बर्मा की मौजूदगी में क्षेत्र के उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग को 27 अक्टूबर 2026 तक का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया कि निर्धारित समयसीमा में राहत नहीं मिली तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई आगे बढ़ाएंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली बिलों में अचानक हुई बढ़ोतरी से आम परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई उपभोक्ता बिलों में दर्ज रीडिंग और देय राशि को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि बिलों में बढ़ोतरी के कारणों को स्पष्ट करने और शिकायतों का निस्तारण करने के लिए विभाग को गंभीरता से पहल करनी चाहिए।

बढ़ी हुई रीडिंग की जांच हो, वास्तविक खपत के आधार पर संशोधित हों बिल

उपभोक्ताओं ने मांग की है कि बिजली बिलों में दर्ज बढ़ी हुई रीडिंग की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जिन मामलों में रीडिंग या बिलिंग में गड़बड़ी सामने आए, उनमें वास्तविक खपत के आधार पर बिलों का संशोधन किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक शिकायतों की जांच कर उचित समाधान नहीं किया जाता, तब तक उपभोक्ताओं की परेशानी दूर होना मुश्किल है।

क्षेत्र के लोगों ने बिजली विभाग से बिलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं को उनकी शिकायतों पर स्पष्ट जवाब देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी आवश्यकता के बिलों में अनियमितता की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

‘जीरो प्लान’ के तहत समाधान की मांग

बढ़ी हुई रीडिंग से जुड़े मामलों के निस्तारण के लिए ग्रामीणों ने ‘जीरो प्लान’ के तहत समाधान की मांग उठाई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि विभाग को शिकायतों की जांच के लिए विशेष व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि गलत या असामान्य बिलों का परीक्षण कर प्रभावित लोगों को राहत दी जा सके।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि केवल स्थानीय स्तर पर आश्वासन देने के बजाय बिजली विभाग के उच्च अधिकारी स्वयं सहिया पहुंचें और उपभोक्ताओं के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनें। बैठक में बिलिंग संबंधी शिकायतों, रीडिंग की जांच और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट कार्ययोजना सामने रखी जानी चाहिए।

साहिया में बैठक कर समाधान दें उच्च अधिकारी

उपभोक्ताओं की प्रमुख मांग है कि बिजली विभाग के उच्च अधिकारी सहिया में होने वाली बैठक में उपस्थित होकर मामले की गंभीरता को समझें। ग्रामीण चाहते हैं कि अधिकारियों की मौजूदगी में शिकायतों की समीक्षा हो और प्रत्येक मामले के समाधान के लिए समयसीमा निर्धारित की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के उपभोक्ताओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार विभागीय कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर शिकायतों की सुनवाई और निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।

27 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक संघर्ष

ग्रामीणों ने बिजली विभाग को 27 अक्टूबर 2026 तक समस्या के समाधान के लिए समय दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में बढ़ी हुई रीडिंग से जुड़ी शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और उच्च अधिकारी सहिया पहुंचकर समाधान की दिशा में पहल नहीं करते, तो उपभोक्ता लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन की रणनीति अपनाएंगे।

उपभोक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी टकराव की नहीं, बल्कि पारदर्शी बिलिंग, निष्पक्ष जांच और न्यायसंगत समाधान की है। वे चाहते हैं कि बिजली विभाग उपभोक्ताओं की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए ऐसी व्यवस्था बनाए, जिससे भविष्य में भी इस प्रकार की समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

अब विभाग के रुख पर टिकी निगाहें

साहिया क्षेत्र में बिजली बिलों को लेकर उठे सवालों के बीच अब सबकी निगाहें बिजली विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। 27 अक्टूबर की समयसीमा नजदीक आने के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग ग्रामीणों की मांगों पर क्या कदम उठाता है और बढ़ी हुई रीडिंग से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए क्या व्यवस्था करता है।

दून वैली टाइम्स इस मामले में उपभोक्ताओं की मांगों, विभाग के पक्ष और आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर बनाए रखेगा।

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