7000 एकड़ जमीन अपने चहेतों को देना चाहती है सरकार: प्रीतम सिंह

डाकपत्थर में ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ की हुंकार, सरकारी भूमि बेचने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस का धरना-प्रदर्शन

विकासनगर, देहरादून।

उत्तराखंड में सरकारी भूमि के आवंटन और संरक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। बुधवार, 4 नवंबर 2026 को डाकपत्थर में कांग्रेस पार्टी ने सरकारी भूमि को खुर्द-बुर्द किए जाने और उसे बेचने के निर्णय के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार से भूमि बेचने के फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की। कार्यक्रम में ‘भूमि बचाओ–धामी हटाओ’ के नारे के बीच प्रदेश सरकार की नीतियों पर निशाना साधा गया।

प्रदेश कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष एवं चकराता विधायक प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार 7000 एकड़ जमीन अपने चहेतों को देना चाहती है। उन्होंने कहा कि डाकपत्थर की सरकारी भूमि किसी की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता की धरोहर है। भूमि से जुड़े फैसलों में जनहित और स्थानीय लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

धरना-प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस नेताओं ने सरकारी भूमि को बेचने के निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में पारदर्शिता होनी चाहिए और जनता के हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। पार्टी नेताओं ने कहा कि भूमि संरक्षण का मुद्दा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ा है।

प्रीतम सिंह की अगुवाई में प्रदर्शन

प्रीतम सिंह की अगुवाई में आयोजित धरना-प्रदर्शन में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रामशरण नौटियाल, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संजय जैन, पछुवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष संजय किशोर, पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात, विकासनगर नगरपालिका अध्यक्ष धीरज बॉबी नौटियाल सहित पछुवादून जिले के वरिष्ठ कांग्रेसजन मौजूद रहे।

प्रदर्शन में सूरत सिंह, विकास शर्मा, विपुल जैन, नीरज रोहिला, अभिनव ठाकुर समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकारी भूमि के संरक्षण तथा भूमि आवंटन से जुड़े फैसले को वापस लेने की मांग उठाई।

भूमि आवंटन को लेकर सरकार पर सवाल

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकारी भूमि से जुड़े फैसलों में आम जनता और स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी की जा रही है। पार्टी ने सरकार से भूमि आवंटन से संबंधित तथ्यों और निर्णयों को सार्वजनिक करने तथा पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

प्रीतम सिंह के 7000 एकड़ जमीन को लेकर दिए गए बयान के बाद इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भूमि आवंटन से जुड़े प्रस्तावों और सरकारी दस्तावेजों के सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

डाकपत्थर में आयोजित धरना-प्रदर्शन के जरिए कांग्रेस ने भूमि संरक्षण के मुद्दे को प्रदेश की राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि सरकार इस विरोध और भूमि बेचने के निर्णय को वापस लेने की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

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