ऋषिकेश–देहरादून हाईवे के सात मोड़ क्षेत्र में प्रस्तावित जंगल कटान के विरोध में गत गुरुवार को स्थानीय लोगों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर जंगल बचाने की अपील की और कहा कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सड़क निर्माण और आधारभूत सुविधाओं का विकास आवश्यक है, लेकिन इसके लिए वर्षों पुराने पेड़ों और घने जंगलों की अनावश्यक कटाई उचित नहीं है। उनका कहना था कि जंगल केवल हरियाली नहीं, बल्कि वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास, जल स्रोतों की सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और संबंधित विभागों से मांग की कि परियोजना के लिए ऐसे वैकल्पिक उपाय अपनाए जाएं, जिनसे न्यूनतम पेड़ों की कटाई हो और पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उत्तराखंड की पहचान उसके जंगलों और प्राकृतिक संपदा से है। ऐसे में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।






