दून वैली टाइम्स | हल्द्वानी (नैनीताल)
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी वन प्रभाग से वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। छकाता रेंज के सिमलिया क्षेत्र से लगे गुमाल गांव के पास जंगल में दो नर बाघों के बीच हुए भीषण संघर्ष में दोनों की मौत हो गई। घटना के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया, जबकि आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हल्द्वानी वन प्रभाग की छकाता रेंज के अंतर्गत गुमाल गांव से लगभग एक किलोमीटर अंदर जंगल में सोमवार सुबह दो नर बाघों के शव मिले। ग्रामीणों का कहना है कि बीती रात जंगल से लगातार बाघों के दहाड़ने और आपस में लड़ने की तेज आवाजें सुनाई दे रही थीं। काफी देर तक यह संघर्ष चलता रहा, लेकिन अचानक आवाजें बंद हो गईं। सुबह जब कुछ ग्रामीण जंगल की ओर पहुंचे तो उन्होंने दोनों बाघों को मृत अवस्था में पड़ा देखा, जिसके बाद तत्काल वन विभाग को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही वन क्षेत्राधिकारी मनीष कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। घटनास्थल का निरीक्षण करने पर दोनों बाघों के आसपास काफी मात्रा में खून फैला मिला। वहीं जमीन पर पंजों के निशान, संघर्ष के स्पष्ट प्रमाण और घसीटे जाने के निशान मिले, जिससे प्रथम दृष्टया यह मामला दोनों बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर हुए भीषण संघर्ष का माना जा रहा है।
वन विभाग की प्रारंभिक जांच में एक बाघ की उम्र लगभग 3 से 4 वर्ष तथा दूसरे की उम्र 4 से 5 वर्ष आंकी गई है। दोनों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान पाए गए। एक बाघ की गर्दन पर गहरे घाव थे, जबकि दूसरे की कमर पर गंभीर चोटें मिलीं। चिकित्सकों के अनुसार दोनों बाघों के सभी अंग, पंजे और नाखून सुरक्षित हैं, जिससे अवैध शिकार की संभावना फिलहाल नहीं मानी जा रही है।
वन विभाग ने दोनों बाघों के शवों का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में कराया, जिसकी पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की गई। साथ ही डीएनए सैंपल और अन्य जैविक नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि मौत के वास्तविक कारणों की वैज्ञानिक पुष्टि की जा सके।
वन अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा। फिलहाल शुरुआती जांच में यह मामला दो नर बाघों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई का प्रतीत हो रहा है।




