हल्द्वानी | Doon Valley Times

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मानपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन पानी की टंकी के भीतर जहरीली गैस बनने से एक ही परिवार के तीन सदस्यों—मां और उनके दो बेटों—की मौत हो गई। सबसे दुखद बात यह रही कि तीनों एक-दूसरे की जान बचाने के प्रयास में टंकी के भीतर उतरते गए और दमघोंटू गैस की चपेट में आने से अपनी जान गंवा बैठे। इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है।
शटरिंग खोलने उतरे बड़े बेटे की बिगड़ी तबीयत
मंगलवार शाम करीब 7 बजे मानपुर गांव निवासी 38 वर्षीय धर्मेंद्र बिष्ट, जो पेशे से प्लंबर थे, अपने घर के पास निर्माणाधीन पानी की टंकी की शटरिंग खोलने के लिए उसके अंदर उतरे। बताया जा रहा है कि टंकी में लंबे समय तक बंद रहने के कारण जहरीली गैस जमा हो गई थी। जैसे ही धर्मेंद्र अंदर पहुंचे, जहरीली गैस के प्रभाव से बेहोश होकर वहीं गिर पड़े।
बड़े भाई को बचाने गया छोटा भाई भी हुआ शिकार
जब काफी देर तक धर्मेंद्र बाहर नहीं आए तो उनके छोटे भाई 34 वर्षीय खुशाल सिंह बिष्ट, जो एक निजी फैक्ट्री में कार्यरत थे, उन्हें देखने के लिए टंकी में उतर गए। लेकिन उन्हें भी टंकी के भीतर मौजूद जहरीली गैस का अंदाजा नहीं था। अंदर पहुंचते ही वह भी बेहोश होकर गिर पड़े।
दोनों बेटों को बचाने उतरी मां की भी गई जान
जब दोनों बेटे काफी देर तक बाहर नहीं आए तो उनकी 59 वर्षीय मां सरस्वती देवी घबराकर उन्हें बचाने के लिए टंकी के भीतर उतर गईं। लेकिन जहरीली गैस के कारण वह भी कुछ ही क्षणों में अचेत होकर गिर पड़ीं। देखते ही देखते एक ही परिवार के तीन सदस्य टंकी के भीतर फंस गए।
चौथे सदस्य की सतर्कता से बची जान
परिवार का एक अन्य सदस्य भी उन्हें बचाने के लिए टंकी की ओर बढ़ा, लेकिन जैसे ही उसे तेज जहरीली गैस का अहसास हुआ, उसने तुरंत पीछे हटने का निर्णय लिया। उसकी सतर्कता के कारण एक और बड़ा हादसा टल गया।
ग्रामीणों ने किया रेस्क्यू, अस्पताल पहुंचने से पहले हो चुकी थी मौत
घटना की सूचना मिलते ही परिजन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद तीनों को टंकी से बाहर निकाला गया और तत्काल हल्द्वानी के डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया। देर रात करीब 8:40 बजे अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही तीनों की मौत हो चुकी थी।
ओखलकांडा का रहने वाला था परिवार
पुलिस के अनुसार, बिष्ट परिवार मूल रूप से नैनीताल जिले के ओखलकांडा क्षेत्र के कौंता गांव का रहने वाला था। धर्मेंद्र बिष्ट प्लंबर का कार्य करते थे, जबकि खुशाल सिंह एक निजी फैक्ट्री में नौकरी करते थे। दोनों अपनी मां सरस्वती देवी के साथ हल्द्वानी के मानपुर गांव में रह रहे थे।
पुलिस और प्रशासन ने शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ तारा सिंह राणा ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
वहीं, एसडीएम हल्द्वानी मोनिका आर्या ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और आर्थिक सहायता की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि टंकी के भीतर जहरीली गैस कैसे बनी और सुरक्षा मानकों में कहीं लापरवाही तो नहीं हुई।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बंद टंकी, सीवर, सेप्टिक टैंक या भूमिगत संरचना में बिना गैस जांच और पर्याप्त वेंटिलेशन के प्रवेश करना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे स्थानों पर ऑक्सीजन की कमी या जहरीली गैसें जानलेवा साबित हो सकती हैं।




