11 जुलाई को धंसी थी अस्थायी पुलिया, 12 जुलाई से शुरू हुआ था नए पुल पर यातायात; अब पुराने राजमार्ग पर फिर मंडराया संकट
दून वैली टाइम्स | देहरादून
देहरादून-पांवटा साहिब के पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नंदा की चौकी के टौंस नदी पुल को लेकर एक बार फिर गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से हाल ही में तैयार किया गया नया मुख्य पुल पहली ही बड़ी बारिश की परीक्षा में खरा नहीं उतर सका। पुल के एक हिस्से में भारी धंसाव होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार पुल का इतनी जल्दी क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है। लोगों ने निर्माण में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

10 महीने तक अस्थायी पुलिया के सहारे चला यातायात
गौरतलब है कि 15 सितंबर 2025 की मध्यरात्रि को टौंस नदी पर बना पुराना मुख्य पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। पुल की एबटमेंट वॉल और एक स्लैब टूटने के बाद देहरादून-पांवटा मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया था।
इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने ह्यूम पाइप डालकर एक अस्थायी पुलिया का निर्माण कराया, जिसके सहारे लगभग 10 महीने तक हजारों छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते रहे।
मार्च 2026 में शुरू हुआ था नए पुल का निर्माण
पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद मार्च 2026 में करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से नए मुख्य पुल का निर्माण शुरू किया गया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 11 जुलाई 2026 की रात तेज बहाव में अस्थायी पुलिया भी धंस गई, जिसके चलते 12 जुलाई 2026 से नए पुल पर वाहनों का संचालन शुरू कर दिया गया।
हालांकि, यातायात शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद हुई पहली बड़ी बारिश में पुल के एक हिस्से में धंसाव सामने आने से लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
निरीक्षण में जुटा प्रशासन, जांच के आदेश
पुल में धंसाव की सूचना मिलने के बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का निरीक्षण किया। विभाग का कहना है कि धंसाव के कारणों की तकनीकी जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक मरम्मत और आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर यातायात की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
स्थानीय लोगों में रोष
क्षेत्रवासियों का कहना है कि जिस पुल के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वह पहली ही बारिश में प्रभावित हो गया। लोगों ने दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने तथा उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच नहीं हुई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
उठ रहे हैं कई बड़े सवाल
- क्या पुल निर्माण में गुणवत्ता मानकों का पूरी तरह पालन किया गया?
- पहली ही बारिश में पुल क्यों धंस गया?
- क्या निर्माण सामग्री या तकनीकी कार्य में कोई कमी रही?
- क्या निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
नंदा की चौकी का यह पुल देहरादून और हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब के बीच महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग का हिस्सा है। ऐसे में पुल में आई यह खामी न केवल निर्माण कार्य पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती है।




