धर्म परिवर्तन के बाद दूसरी बार कांवड़ यात्रा पर निकले शंकर-सावित्री

हरिद्वार के ब्रह्मकुंड से उठाया गंगाजल, शिवरात्रि पर जन्मभूमि में करेंगे भगवान शिव का जलाभिषेक

हरिद्वार, संवाददाता। श्रावण मास की कांवड़ यात्रा के बीच हरिद्वार में धर्म परिवर्तन कर सनातन धर्म अपनाने वाले दंपति शंकर और सावित्री दूसरी बार कांवड़ लेकर अपनी जन्मभूमि के लिए रवाना हुए। चंडीघाट स्थित ब्रह्मकुंड से उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल उठाया। दंपति का संकल्प शिवरात्रि के अवसर पर अपनी जन्मभूमि बहेड़ी गुर्जर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने का है।

कांवड़ यात्रा शुरू करने से पूर्व दंपति ने तीर्थाचार्य संत राम विशाल दास महाराज से आशीर्वाद लिया। पंडितों की उपस्थिति में वैदिक रीति-रिवाज से गंगाजल का पूजन कराया गया। इस अवसर पर हितेश दास महाराज, महातार शास्त्री सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे। इसके बाद दोनों ने बाबा हठयोगी महाराज का भी आशीर्वाद प्राप्त किया और यात्रा के लिए रवाना हो गए।

शंकर, जिन्हें पहले शहजाद के नाम से जाना जाता था, ने बताया कि श्रावण मास में दूसरी बार कांवड़ उठाना उनके लिए आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव है। उनका कहना है कि सनातन परंपरा से जुड़ना उनकी आस्था और अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने का माध्यम है। इसी भावना के साथ वह भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए गंगाजल लेकर जा रहे हैं।

बताया गया कि इससे पहले हरिद्वार में परिवार के धार्मिक संस्कार वैदिक विधि-विधान से संपन्न कराए गए थे। गंगा स्नान, शुद्धिकरण, हवन-यज्ञ और अन्य अनुष्ठानों के बाद परिवार के सदस्यों के नाम भी वैदिक परंपरा के अनुरूप रखे गए। शहजाद का नाम शंकर, उनकी पत्नी रजिया का नाम सावित्री, बड़ी बेटी का नाम रुक्मणी, छोटी बेटी का नाम दीक्षा तथा बेटे का नाम रुद्र रखा गया। दंपति का विवाह संस्कार भी हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार संपन्न कराया गया।

इस दौरान संत राम विशाल दास महाराज ने कहा कि किसी भी धर्म या आध्यात्मिक मार्ग को अपनाना व्यक्ति की श्रद्धा और स्वतंत्र इच्छा का विषय है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में आस्था रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान किया जाना चाहिए।

शंकर ने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी इच्छा से सनातन धर्म अपनाया है। साथ ही उन्होंने कुछ लोगों से सुरक्षा संबंधी आशंका भी जताई। इस पर संतों ने प्रशासन से परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

(नोट: धर्म परिवर्तन, सुरक्षा संबंधी आशंकाओं और अन्य दावों का आधार संबंधित पक्षों के बयान हैं। प्रशासन की ओर से यदि कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि जारी होती है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।)

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