शादी के सात साल के भीतर असामान्य परिस्थितियों में हुई मौत, दहेज प्रताड़ना के आरोपों और जांच की स्थिति को देखते हुए अदालत ने राहत देने से किया इनकार
देहरादून। शिक्षिका सृष्टि कंडारी की आत्महत्या से जुड़े मामले में उनकी सास प्रवीणा खत्री को अदालत से एक बार फिर राहत नहीं मिल सकी। प्रभारी सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिक की अदालत ने प्रवीणा खत्री की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने मामले की गंभीरता, सामने आए आरोपों और विवेचना की वर्तमान स्थिति को देखते हुए गिरफ्तारी से पहले जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं पाया।

यह मामला सृष्टि कंडारी की 29 जुलाई 2026 को हुई मौत से जुड़ा है। सृष्टि का विवाह नवंबर 2025 में प्रवीणा खत्री के बेटे सौरभ खत्री से हुआ था। मामले में सृष्टि के मायके पक्ष की ओर से उसके पति, सास और ननद पर मानसिक प्रताड़ना तथा दहेज से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। पुलिस की विवेचना में परिजनों के बयान और अन्य तथ्यों को भी शामिल किया गया है।
मां को भेजे वीडियो ने बढ़ाई मामले की गंभीरता
अभियोजन पक्ष ने अदालत में प्रवीणा खत्री की अग्रिम जमानत का विरोध किया। अभियोजन के अनुसार, सृष्टि ने मौत से पहले अपनी मां को व्हाट्सऐप के माध्यम से करीब छह मिनट का एक वीडियो भेजा था। बताया गया कि इस वीडियो में सृष्टि ने अपने पति, सास और ननद पर लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना करने और अपशब्द कहने के आरोप लगाए थे।
अभियोजन के मुताबिक, विवेचना के दौरान सृष्टि की बहन रुचि, जीजा पंकज सिंह राणा और भाई देवांशु उर्फ गुंजन खंडूरी के बयान भी दर्ज किए गए। इन बयानों में भी सृष्टि को दहेज को लेकर परेशान किए जाने और ताने दिए जाने के आरोप सामने आने की बात अदालत के समक्ष रखी गई।
बचाव पक्ष ने उम्र और पारिवारिक परिस्थितियों का दिया हवाला
वहीं, बचाव पक्ष ने प्रवीणा खत्री के खिलाफ दर्ज मुकदमे को गलत तथ्यों पर आधारित बताते हुए अग्रिम जमानत की मांग की। अदालत को बताया गया कि प्रवीणा खत्री की उम्र 66 वर्ष से अधिक है और वह शिक्षा विभाग में लेक्चरर के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं।
बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि परिवार ने सृष्टि से दहेज की मांग अथवा उसे प्रताड़ित किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। याचिका में प्रवीणा के पति मनोहर खत्री की गंभीर बीमारी का भी हवाला दिया गया। बताया गया कि वह ब्रेन कैंसर की चौथी स्टेज से जूझ रहे थे और उपचार के दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती रही। 26 जुलाई 2026 को उनका निधन हो गया था।
अदालत ने विवेचना और आरोपों की गंभीरता को माना अहम
अदालत ने मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि सृष्टि की मौत विवाह के सात वर्ष के भीतर असामान्य परिस्थितियों में हुई है और मामले में दहेज मृत्यु से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि मामले की विवेचना अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध तथ्यों, आरोपों की प्रकृति और जांच की स्थिति को देखते हुए अदालत ने प्रवीणा खत्री को अग्रिम जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं पाया।
पहले भी मांगी थी अंतरिम अग्रिम जमानत
प्रवीणा खत्री इससे पहले भी गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का रुख कर चुकी हैं। 1 अगस्त को उनकी ओर से अंतरिम अग्रिम जमानत की मांग की गई थी, लेकिन उस समय भी अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें राहत नहीं दी थी।
इसके बाद 10 अगस्त को अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इससे मामले में आरोपी पक्ष की मुश्किलें बढ़ गई हैं और पुलिस की विवेचना पर भी अब निगाहें टिकी हैं।
मामला जांच के दौर में
सृष्टि कंडारी की मौत के बाद से ही यह मामला चर्चा में है। मायके पक्ष की ओर से लगाए गए गंभीर आरोप, सृष्टि का कथित वीडियो और परिजनों के बयान विवेचना का हिस्सा हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आगे की कार्रवाई विवेचना में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर होगी।
