खनन बंद, फिर नून नदी में कैसे पहुंची पिकअप?

तेज बहाव में बही गाड़ी, खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

देहरादून। जैंतनवाला क्षेत्र की नून नदी में तेज पानी के बहाव में एक पिकअप वाहन के बह जाने की घटना ने खनन गतिविधियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि पिकअप वाहन कथित तौर पर खनन के सिलसिले में नदी क्षेत्र में पहुंचा था। इसी दौरान अचानक नदी का बहाव तेज हो गया और वाहन पानी की धार में बह गया।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नदियों और खनन क्षेत्रों में खनन गतिविधियां बंद हैं, तो आखिर पिकअप वाहन नदी के भीतर कैसे पहुंचा? यदि नदी का जलस्तर अचानक नहीं बढ़ता तो संभव है कि वाहन के नदी में पहुंचने का मामला सामने ही नहीं आता।

पछवादून क्षेत्र की नदियों में खनन गतिविधियों को लेकर लंबे समय से निगरानी और कार्रवाई की जरूरत जताई जाती रही है। बंद अवधि में भी नदी क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी नहीं होने की स्थिति में अवैध खनन की आशंका को बल मिलता है।

हालांकि, पिकअप वाहन के नदी में पहुंचने और उसके कथित रूप से खनन से जुड़े होने की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में प्रशासन के सामने यह पता लगाना भी जरूरी है कि वाहन नदी तक किस रास्ते से पहुंचा और वहां उसकी मौजूदगी का उद्देश्य क्या था।

घटना ने खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंद अवधि में नदी क्षेत्रों में नियमित निगरानी और अनधिकृत वाहनों की आवाजाही पर रोक जरूरी है।

सबसे अहम चिंता सुरक्षा को लेकर है। नदियों में अचानक पानी का बहाव बढ़ने की घटनाएं बरसात के दौरान सामने आती रहती हैं। ऐसे में नदी के भीतर वाहनों की मौजूदगी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यदि वाहन में कोई व्यक्ति सवार होता और तेज बहाव की चपेट में आता, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।

अब जरूरत है कि जैंतनवाला सहित पूरे पछवादून क्षेत्र की नदियों में बंद अवधि के दौरान विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए। नदी क्षेत्र में पहुंचने वाले वाहनों की जांच हो और यह भी पता लगाया जाए कि अनधिकृत रूप से नदी तक पहुंचने के लिए उन्हें रास्ता किस स्तर से उपलब्ध हो रहा है।

फिलहाल सवाल यही है—खनन बंद होने के बावजूद पिकअप नदी तक पहुंची कैसे? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन घटना ने संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था को जरूर कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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