उत्तराखंड सचिवालय की सुरक्षा में बड़ी चूक, लाइसेंसी पिस्टल के साथ परिसर में पहुंचा निजी सुरक्षा गार्ड, जांच शुरू

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देहरादून | दून वैली टाइम्स

उत्तराखंड सचिवालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गत गुरुवार को उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब एक कारोबारी के साथ आया उसका निजी सुरक्षा गार्ड अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर बिना समुचित सुरक्षा जांच के सचिवालय परिसर में प्रवेश कर गया। घटना की जानकारी मिलते ही सचिवालय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और खुफिया विभाग में हड़कंप मच गया। गार्ड को तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

बिना जांच के मिला प्रवेश

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक कारोबारी किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात करने के लिए सचिवालय पहुंचा था। उसके साथ उसका निजी सुरक्षा गार्ड भी वाहन में मौजूद था। बताया जा रहा है कि किसी अधिकारी से टेलीफोन पर हुई बातचीत के आधार पर वाहन को सचिवालय परिसर में प्रवेश की अनुमति दे दी गई। इस दौरान वाहन में बैठे लोगों की न तो व्यक्तिगत तलाशी ली गई और न ही सुरक्षा जांच की गई।

इसी चूक का फायदा उठाते हुए निजी सुरक्षा गार्ड अपनी लाइसेंसी पिस्टल के साथ सीधे सचिवालय परिसर के भीतर पहुंच गया।

परिसर में घूमता रहा सुरक्षा गार्ड

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कारोबारी अधिकारी से मिलने के लिए सचिवालय भवन के अंदर चला गया, जबकि उसका निजी सुरक्षा गार्ड बाहर परिसर में काफी देर तक घूमता रहा। जिस क्षेत्र में मुख्यमंत्री के काफिले की आवाजाही होती है, उसी इलाके के आसपास वाहन भी खड़ा किया गया था। इस दौरान किसी भी सुरक्षा कर्मी ने उससे पूछताछ नहीं की और न ही उसके पास मौजूद हथियार के संबंध में जानकारी ली।

सूचना मिलते ही मचा हड़कंप

कुछ समय बाद सुरक्षा कर्मियों और इंटेलिजेंस यूनिट को सूचना मिली कि सचिवालय परिसर में एक व्यक्ति हथियार के साथ मौजूद है। सूचना मिलते ही सुरक्षा अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति को घेर लिया और उसे वाहन के पास ले जाकर पूछताछ शुरू की। इसके बाद वाहन की भी गहन तलाशी ली गई।

सुरक्षा अधिकारी के कार्यालय में हुई पूछताछ

निजी सुरक्षा गार्ड को सचिवालय सुरक्षा अधिकारी जीवन सिंह बिष्ट के कार्यालय ले जाया गया, जहां उससे सचिवालय में प्रवेश, हथियार साथ लाने और सुरक्षा प्रक्रिया को लेकर विस्तार से पूछताछ की गई।

पूछताछ में गार्ड ने बताया कि वह अपने मालिक के साथ सचिवालय आया था। उसके मालिक किसी अधिकारी से मिलने गए थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि वाहन का कोई प्रवेश पास नहीं बनाया गया था और केवल टेलीफोन पर मिली अनुमति के आधार पर वाहन को अंदर जाने दिया गया।

सुरक्षा अधिकारी ने क्या कहा?

सुरक्षा अधिकारी जीवन सिंह बिष्ट ने बताया कि सूचना मिलने के बाद संबंधित व्यक्ति को तुरंत कार्यालय लाकर पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि व्यक्ति के पास छोटी लाइसेंसी पिस्टल थी, जो प्रवेश के समय सुरक्षा कर्मियों की नजर में नहीं आ सकी। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार वाहनों की पूरी तरह जांच नहीं हो पाती, जिसके कारण यह चूक हुई।

जांच के घेरे में प्रवेश प्रक्रिया

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वाहन के सचिवालय में प्रवेश के समय उसमें बैठे लोगों की सुरक्षा जांच नहीं की गई। अब यह जांच की जा रही है कि बिना प्रवेश पास के वाहन को किस अधिकारी के निर्देश पर अंदर जाने की अनुमति दी गई और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन क्यों नहीं किया गया।

सचिवालय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कर रही हैं। यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

उत्तराखंड सचिवालय प्रदेश का सबसे संवेदनशील प्रशासनिक परिसर माना जाता है, जहां मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से मौजूद रहते हैं। ऐसे संवेदनशील परिसर में बिना सुरक्षा जांच के किसी व्यक्ति का हथियार सहित प्रवेश कर जाना सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

हालांकि पूछताछ में यह स्पष्ट हुआ कि सुरक्षा गार्ड के पास मौजूद पिस्टल लाइसेंसी थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल अवैध हथियार रोकना नहीं, बल्कि हर प्रकार के हथियार की विधिवत जांच सुनिश्चित करना होता है।

अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद इस सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाते हैं।

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