चकराता वन प्रभाग में 1,895.297 घनमीटर लंबित हक-हकूक के वितरण का प्रस्ताव तैयार
स्थानीय विधायक प्रीतम सिंह ने वनमंत्री से कई बार उठाया था मामला, विधानसभा सत्र में भी प्रमुखता से गूंजा मुद्दा
दून वैली टाइम्स | विशेष रिपोर्ट
चकराता/देहरादून, 5 सितंबर। जौनसार-बावर के हजारों हक-हकूकदारों से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में बड़ी उम्मीद जगी है। चकराता वन प्रभाग में वर्ष 2022-23 के अवशेष हक-हकूक की 1,895.297 घनमीटर लकड़ी के वितरण को लेकर विभागीय स्तर पर प्रस्ताव तैयार किया गया है। मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में इस लंबित बैकलॉग के निस्तारण को लेकर विस्तृत समीक्षा के बाद निर्धारित सीमा के भीतर वितरण के लिए अनुमोदन प्रस्तावित किया गया है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में चकराता वन प्रभाग में हक-हकूक का वितरण नहीं हो पाया था। विभागीय दस्तावेजों में इसका कारण कनासर रेंज में अवैध पातन की घटनाओं को बताया गया है। लगातार दो वर्षों तक वितरण प्रभावित रहने के कारण हक-हकूक का बैकलॉग बढ़ता गया और क्षेत्र के लोग अपने परंपरागत अधिकारों के वितरण की मांग करते रहे।
विधायक प्रीतम सिंह ने लगातार उठाया मामला
हक-हकूक के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक प्रीतम सिंह के स्तर से भी लगातार पैरवी की गई। क्षेत्र के हक-हकूकदारों की मांग को लेकर विधायक की ओर से प्रदेश के वन मंत्री से कई बार मुलाकात कर लंबित हक-हकूक के वितरण की मांग रखी गई। इतना ही नहीं, विधानसभा सत्र के दौरान भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर सरकार का ध्यान जौनसार-बावर के हक-हकूकदारों की समस्या की ओर आकर्षित किया गया।
लगातार राजनीतिक और क्षेत्रीय स्तर पर उठाए गए इस मुद्दे के बीच अब वन विभाग के उच्चस्तरीय दस्तावेजों में लंबित हक-हकूक के निस्तारण को लेकर प्रस्ताव सामने आया है।
24 जून की बैठक में हुआ महत्वपूर्ण फैसला
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार 24 जून 2026 को मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल), उत्तराखंड की अध्यक्षता में चकराता वन प्रभाग के वर्षवार देय हक-हकूक, जिसमें बैकलॉग भी शामिल है, को लेकर समिति की बैठक आयोजित हुई।
बैठक में शिवालिक, गढ़वाल, भागीरथी, यमुना और चकराता वन प्रभाग से संबंधित अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। बैठक में हक-हकूक वितरण की निर्धारित वार्षिक सीमा, पूर्व में वितरित मात्रा, लंबित बैकलॉग तथा संबंधित नियमों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
समिति ने पन्नालाल सेटेलमेंट, वन विभाग की अधिसूचनाओं और उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्धारित सीमा समेत संबंधित प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए मामले की समीक्षा की।
1,895.297 घनमीटर के वितरण का प्रस्ताव
दस्तावेज में चकराता वन प्रभाग के लिए स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि वर्तमान सिल्वीकल्चर वर्ष 2025-26 में वर्ष 2022-23 के अवशेष हक-हकूक की 1,895.297 घनमीटर मात्रा के वितरण के लिए गढ़वाल मंडल की निर्धारित अवशेष सीमा के अंतर्गत अनुमोदन किया जाना प्रस्तावित है।
यानी लंबे समय से लंबित वर्ष 2022-23 के हक-हकूक के एक बड़े हिस्से के वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, विभागीय दस्तावेज में इसे ‘प्रस्तावित अनुमोदन’ बताया गया है, इसलिए इसे अंतिम स्वीकृति के बजाय स्वीकृति की प्रक्रिया में चल रहा प्रस्ताव माना जाना चाहिए।
4,517 घनमीटर का सामने आया आंकड़ा
विभागीय रिकॉर्ड में वर्ष 2022-23 के अवशेष और वर्ष 2024-25 के देय हक-हकूक को मिलाकर 4,517 घनमीटर की मात्रा का उल्लेख किया गया है।
इसमें—
1,895.297 घनमीटर — वर्ष 2022-23 का अवशेष हक-हकूक
2,622 घनमीटर — वर्ष 2024-25 का देय हक-हकूक
बताया गया है।
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2023-24 और 2024-25 में कनासर रेंज में अवैध पातन की घटनाओं के कारण हक-हकूक वितरण नहीं हो सका था।
तीन वर्षों के आंकड़ों से समझें पूरा मामला
चकराता वन प्रभाग के दस्तावेजों में पिछले वर्षों में हक-हकूक वितरण की स्थिति भी दर्ज है।
- वर्ष 2020-21: 1,182.995 घनमीटर वितरण
- वर्ष 2021-22: 1,578.604 घनमीटर वितरण
- वर्ष 2022-23: 726.703 घनमीटर वितरण, जबकि 1,895.297 घनमीटर अवशेष
- वर्ष 2023-24: वितरण नहीं हुआ
- वर्ष 2024-25: वितरण नहीं हुआ
- वर्ष 2022-23 व 2024-25: कुल 4,517 घनमीटर देय/अवशेष का उल्लेख
2025-26 में भी वितरण प्रक्रिया जारी
दस्तावेजों में वर्तमान वर्ष 2025-26 के हक-हकूक वितरण की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार विगत वर्ष 2024-25 के सापेक्ष प्राप्त 37 खतों के आवेदनों पर 1,728.663 घनमीटर के अनुमोदन के उपरांत वितरण की कार्यवाही गतिमान है।
इससे स्पष्ट है कि विभाग की ओर से वर्तमान वर्ष के साथ-साथ पुराने बैकलॉग को भी निर्धारित नियमों और उपलब्ध सीमा के अनुसार निस्तारित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
जौनसार-बावर की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़ा है मामला
हक-हकूक का मुद्दा जौनसार-बावर क्षेत्र की पारंपरिक अधिकार व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। विभागीय प्रस्ताव में 17 जुलाई 1920 की वन अधिसूचना और पन्नालाल सेटेलमेंट का उल्लेख करते हुए क्षेत्र में हक-हकूक व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि बताई गई है।
दस्तावेजों में यह भी उल्लेख है कि जौनसार-बावर के विभिन्न खतों में परंपरागत रूप से हक-हकूक की व्यवस्था रही है और निर्धारित नियमों के तहत पात्र हकदारों को इसका लाभ दिया जाता है।
अब अंतिम स्वीकृति पर टिकी नजर
वर्षों से लंबित हक-हकूक के मामले में विभागीय समिति द्वारा 1,895.297 घनमीटर के प्रस्तावित वितरण से क्षेत्र के हक-हकूकदारों में उम्मीद जगी है। अब नजर इस बात पर है कि प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति कब मिलती है और वितरण की वास्तविक प्रक्रिया कब शुरू होती है।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इस मुद्दे को उठाने वाले जनप्रतिनिधियों और हक-हकूकदारों की मांग है कि लंबित अधिकारों का निस्तारण निर्धारित नियमों के तहत जल्द किया जाए, ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे पात्र परिवारों को उनके अधिकार का लाभ मिल सके।
दून वैली टाइम्स की खास पड़ताल
1,895.297 घनमीटर — वर्ष 2022-23 का लंबित हक-हकूक
4,517 घनमीटर — वर्ष 2022-23 व 2024-25 का कुल उल्लेखित देय/अवशेष
2,622 घनमीटर — वर्ष 2024-25 की देय मात्रा
1,728.663 घनमीटर — 2025-26 में 37 खतों से संबंधित अनुमोदन के बाद वितरण प्रक्रिया में
नोट: विभागीय दस्तावेजों के अनुसार 1,895.297 घनमीटर के लिए अनुमोदन प्रस्तावित है; इसे अंतिम स्वीकृति के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।
