पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान ने उठाई विधायक निधि की निष्पक्ष जांच की मांग, सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा—जांच हो तो सभी विकास निधियों की क्यों नहीं?
देहरादून/चकराता। चकराता विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि के उपयोग को लेकर उठे सवालों के बाद अब मामला सोशल मीडिया पर भी बहस का विषय बन गया है। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं भाजपा नेत्री मधु चौहान ने गत मंगलवार को विधायक निधि से कराए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और अब बहस का दायरा विधायक निधि से आगे बढ़कर जिला पंचायत निधि और सांसद निधि तक पहुंच गया है।
मधु चौहान की ओर से विधायक निधि की जांच की मांग के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि यदि विधायक निधि से कराए गए विकास कार्यों की जांच जरूरी है, तो जिला पंचायत निधि और सांसद निधि से कराए गए विकास कार्यों एवं खर्च की भी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?
सोशल मीडिया पर उठे सवालों ने बढ़ाई बहस
सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं में कुछ लोगों का कहना है कि विकास कार्यों के लिए खर्च होने वाली प्रत्येक सरकारी निधि में पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। इसी क्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यकाल के दौरान जिला पंचायत निधि से कराए गए कार्यों तथा क्षेत्र में सांसद निधि से हुए विकास कार्यों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने की मांग सोशल मीडिया पर उठ रही है।
हालांकि, इन चर्चाओं को फिलहाल सोशल मीडिया पर उठाए गए सवाल और मांगों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति, जनप्रतिनिधि अथवा संस्था के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का निष्कर्ष केवल सक्षम और अधिकृत जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
सवाल सिर्फ विधायक निधि तक सीमित क्यों?
अब मुख्य सवाल यह है कि यदि विधायक निधि की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है तो क्या जिला पंचायत निधि, सांसद निधि, क्षेत्र पंचायत निधि और अन्य सरकारी विकास योजनाओं के तहत खर्च हुई धनराशि की भी जांच होनी चाहिए?
यदि सरकार या प्रशासन व्यापक स्तर पर जांच कराता है तो स्वीकृत कार्यों की सूची, स्वीकृत धनराशि, कार्य की लागत, टेंडर प्रक्रिया, कार्यदायी संस्था, भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता और मौके पर हुए वास्तविक कार्य का मिलान किया जा सकता है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी धन से स्वीकृत विकास कार्य धरातल पर किस स्थिति में हैं।
जनता के पैसे का सवाल, पारदर्शिता जरूरी
चकराता-जौनसार-बावर क्षेत्र में सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, संपर्क मार्ग और अन्य विकास कार्यों के लिए अलग-अलग सरकारी योजनाओं और निधियों से धनराशि खर्च की जाती है। यह धनराशि जनता के विकास के लिए होती है। ऐसे में यदि किसी एक निधि को लेकर जांच की मांग उठती है तो सभी संबंधित विकास निधियों के कार्यों का निष्पक्ष एवं पारदर्शी ऑडिट कराने की मांग भी चर्चा में आना स्वाभाविक है।
इस पूरे मामले में किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगाना उद्देश्य नहीं है। मूल सवाल यह है कि जनता के पैसे से कराए गए विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाए।
निष्पक्ष जांच से राजनीतिक बहस पर लग सकता है विराम
विधायक निधि को लेकर उठी जांच की मांग के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस के बीच यदि सक्षम स्तर पर निष्पक्ष जांच होती है और जांच का दायरा विधायक निधि के साथ जिला पंचायत निधि, सांसद निधि तथा अन्य विकास योजनाओं तक रखा जाता है तो इससे कई सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सकता है।
जांच में यदि कोई अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है और यदि आरोप निराधार पाए जाते हैं तो संबंधित जनप्रतिनिधियों को भी स्पष्टता मिलेगी। इस तरह निष्पक्ष जांच से राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया का इंतजार
विधायक निधि की जांच की मांग और उसके बाद जिला पंचायत व सांसद निधि को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की निगाहें प्रशासन तथा संबंधित जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया पर हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच केवल विधायक निधि तक सीमित रहेगी या फिर चकराता विधानसभा क्षेत्र में विभिन्न माध्यमों से खर्च हुई विकास निधियों की व्यापक जांच कराई जाएगी।
दून वैली टाइम्स का सवाल: जनता के पैसे से होने वाले विकास कार्यों की जांच हो तो क्या जांच का दायरा सभी विकास निधियों तक समान रूप से नहीं होना चाहिए?
आपकी राय क्या है?
क्या केवल विधायक निधि की जांच होनी चाहिए या विधायक निधि के साथ जिला पंचायत निधि, सांसद निधि, क्षेत्र पंचायत निधि और अन्य विकास योजनाओं के तहत हुए कार्यों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। क्योंकि सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं, सवाल जनता के पैसे और जनता के विकास का है।
