ग्रीन बिल्डिंग की धीमी प्रगति पर डीएम सख्त, कार्यदायी संस्था को फटकार

40.5 प्रतिशत ही हुआ निर्माण कार्य, पर्याप्त बजट के बावजूद देरी पर उच्चस्तरीय जांच के निर्देश

देहरादून, 9 सितंबर। उत्तराखंड की पहली इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने परियोजना की समीक्षा बैठक में निर्माण कार्य की गति पर गहरी नाराजगी जताई। पर्याप्त धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद परियोजना में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उन्होंने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।

ग्रीन बिल्डिंग परियोजना में अब तक केवल 40.5 प्रतिशत भौतिक प्रगति होने पर जिलाधिकारी ने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के मुख्य अभियंता को मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी या संबंधित संस्था की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकतानुसार वसूली की प्रक्रिया भी अमल में लाई जाएगी।

पर्याप्त बजट के बावजूद काम में देरी पर नाराजगी

जिलाधिकारी ने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग राज्य की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है और इसके निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को सभी लंबित औपचारिकताएं तत्काल पूरी करने तथा निर्माण स्थल पर पर्याप्त मैनपावर, मशीनरी और निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

डीएम ने स्पष्ट किया कि परियोजना की प्रगति की अब हर 15 दिन में स्वयं समीक्षा की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगली समीक्षाओं में भी यदि काम की गति संतोषजनक नहीं मिली तो कार्यदायी संस्था के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

21 करोड़ रुपये होल्ड करने पर जवाब तलब

बैठक में कार्यदायी संस्था द्वारा 21 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड किए जाने का मामला भी सामने आया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने कहा कि जब परियोजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया गया है तो धनराशि होल्ड रखने और निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भवन निर्माण कार्य को तय समयसीमा के अनुरूप पूरा करना कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है। पर्याप्त बजट उपलब्ध होने के बावजूद निर्माण में देरी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

जून तक शुरू होने वाले कई काम अब तक लंबित

समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि एक्सटर्नल सीवरेज सिस्टम, टाइल वर्क, साइट डिप्लॉयमेंट और डोर शटर फिटिंग जैसे कई कार्य, जिन्हें जून माह तक शुरू हो जाना चाहिए था, वे अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं।

इसके अलावा परियोजना के पर्ट चार्ट में भी भ्रामक एवं गलत जानकारी दर्ज किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

ई-बसों के नियमित संचालन के निर्देश

बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत संचालित ई-बस सेवा की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्धारित रूटों पर ई-बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जो भी ई-बसें वर्तमान में ऑपरेशनल नहीं हैं, उनके संबंध में स्पष्ट कारण प्रस्तुत किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्मार्ट सिटी की योजनाओं का उद्देश्य आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

ये अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, सीपीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता देवेंद्र प्रकाश, स्मार्ट सिटी के एसीईओ तीर्थ पाल सिंह, एजीएम आईटी मनवीर जोशी और एजीएम वाटर वर्क केपी चमोला समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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