मंत्री से जुड़े उत्पीड़न मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, कई दिनों से झांसी में छिपे होने की थी सूचना; अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद जारी हुआ था गैर जमानती वारंट
देहरादून। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य से जुड़े कथित घरेलू उत्पीड़न और आपराधिक आरोपों के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस और विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश के झांसी से मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी को गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि वह पिछले कई दिनों से झांसी में छिपे हुए थे। गिरफ्तारी के बाद पुलिस और एसआईटी की टीम उन्हें लेकर देहरादून के लिए रवाना हो गई है। यहां उनसे मामले के संबंध में पूछताछ की जाएगी।
गिरधारी साहू की गिरफ्तारी को इस प्रकरण में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने पहले उत्तराखंड हाई कोर्ट और फिर जिला न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन दोनों जगह से उन्हें राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग भी खारिज कर दी थी। इसके बाद विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका निरस्त करते हुए गैर जमानती वारंट जारी किया था।
15 अक्टूबर को दर्ज हुई थी प्राथमिकी, पति पर लगाए गंभीर आरोप
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने 15 अक्टूबर 2026 को देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने वैवाहिक संबंधों से जुड़े विवाद, कथित उत्पीड़न, मारपीट, गाली-गलौज, धोखाधड़ी और जान से मारने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
रेखा आर्य के अनुसार, दोनों का विवाह छह जुलाई 2004 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। उनका आरोप है कि विवाह के समय गिरधारी साहू ने खुद को अविवाहित बताया था, जबकि बाद में उन्हें जानकारी मिली कि वह पहले से विवाहित थे और उनके बच्चे भी थे।
मंत्री ने शिकायत में आरोप लगाया कि पति के अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआत में पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मौखिक और लिखित रूप से माफी मांगी थी, लेकिन इसके बावजूद कथित गतिविधियां जारी रहीं।
कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में हत्या की साजिश का दावा
इस पूरे मामले का एक गंभीर पहलू कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है। रेखा आर्य ने आरोप लगाया है कि इस रिकॉर्डिंग में गिरधारी साहू एक महिला से बातचीत के दौरान उन्हें रास्ते से हटाने और इसके लिए धन खर्च करने की बात करते सुनाई दे रहे हैं। मंत्री ने इस कथित बातचीत को अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया था।
एफआईआर दर्ज कराने के बाद रेखा आर्य ने फेसबुक पर एक वीडियो और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी साझा की थी। वीडियो में उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन से जुड़े कथित उत्पीड़न की पीड़ा जाहिर करते हुए महिलाओं से घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि घरेलू अत्याचार को सहना नहीं चाहिए, बल्कि उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। हालांकि, कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान और बातचीत की वास्तविक परिस्थितियों का निर्धारण पुलिस की जांच के बाद ही हो सकेगा।
सरकारी आवास पर जातिसूचक टिप्पणी और दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप
रेखा आर्य ने अपनी शिकायत में एक अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि गिरधारी साहू ने उनके सरकारी आवास पर स्टाफ की मौजूदगी में उनके खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया।
इसके अलावा उन्होंने कंपनी से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेराफेरी कर उन्हें निदेशक पद से हटाने का प्रयास किए जाने का भी आरोप लगाया है। मंत्री के मुताबिक, संबंधित दस्तावेजों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए, जबकि उन्होंने न तो कोई इस्तीफा दिया था और न ही निदेशक पद छोड़ने की सहमति दी थी।
इस घटनाक्रम के बाद रेखा आर्य की तबीयत बिगड़ने और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
हाई कोर्ट में दी थी चुनौती, गिरफ्तारी से राहत नहीं मिली
गिरधारी साहू ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त कराने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए उत्तराखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। बचाव पक्ष की ओर से दलील दी गई थी कि रेखा आर्य और गिरधारी साहू का विवाह जुलाई 2004 में हुआ था और दोनों करीब 22 वर्षों से वैवाहिक संबंध में हैं। इसलिए इस विवाद को मूल रूप से घरेलू और वैवाहिक विवाद बताते हुए आपराधिक कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।
हालांकि, हाई कोर्ट ने प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद जिला न्यायालय में भी अग्रिम जमानत के लिए राहत नहीं मिलने पर विशेष अदालत ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया। आखिरकार पुलिस ने झांसी से उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
इन धाराओं में दर्ज है मुकदमा
प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 323, 420, 467, 468, 471, 495, 498-ए, 504 और 506 के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं 3(1)(द), 3(1)(ध) और 3(2)(va) दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।
अब एसआईटी की पूछताछ पर टिकी निगाहें
गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच और एसआईटी की पूछताछ पर सभी की निगाहें टिकी हैं। पुलिस कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, शिकायत में लगाए गए आरोपों, कंपनी के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच करेगी। पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। गिरफ्तारी अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करती है।
