एक फैसले ने बचाई तमक नाले पर पोकलेन ऑपरेटर की जिंदगी

जलसैलाब में मौत से लौट आया जोगिंदर सिंह, सूझबूझ से बचाई अपनी जान और मशीन; डेढ़ मिनट तक उफनते पानी और बोल्डरों के बीच फंसी रही पोकलेन

चमोली। नीती घाटी में सोमवार शाम तमक नाले में आए भीषण जलसैलाब ने कुछ ही मिनटों में तबाही का ऐसा मंजर खड़ा कर दिया, जिसने हर किसी को दहला दिया। उफनते पानी के साथ बहकर आए भारी मलबे और विशाल बोल्डरों ने ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर बने वैली ब्रिज को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पुल जलसैलाब में बह गया। इसी दौरान सड़क निर्माण कार्य में लगी एक पोकलेन मशीन भी अचानक चारों तरफ से पानी और मलबे से घिर गई।

मशीन के भीतर मौजूद जम्मू-कश्मीर निवासी जोगिंदर सिंह के सामने जिंदगी बचाने की चुनौती थी। हालात इतने भयावह थे कि बाहर निकलना जान जोखिम में डालने के बराबर था। ऐसे समय में जोगिंदर सिंह ने घबराने के बजाय एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी जिंदगी बचा दी। उन्होंने पोकलेन से बाहर निकलकर भागने के बजाय मशीन के अंदर ही रहने और उसे सुरक्षित दिशा में निकालने का फैसला किया।

करीब एक से डेढ़ मिनट तक पोकलेन मशीन उफनते पानी, मलबे और बोल्डरों के बीच फंसी रही। हर पल खतरा मंडरा रहा था, लेकिन जोगिंदर सिंह ने धैर्य नहीं खोया। उन्होंने स्थिति को समझते हुए मशीन को धीरे-धीरे सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाया। आखिरकार उनकी सूझबूझ काम आई और वह मशीन को सुरक्षित स्थान तक निकालने में सफल रहे। इसके साथ ही उनकी जान भी बच गई।

पलक झपकते बदल गए हालात

घटना सोमवार शाम करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है। ज्योतिर्मठ-मलारी मोटर मार्ग पर तमक नाले में अचानक तेज जलप्रवाह आया। देखते ही देखते पानी का वेग इतना बढ़ गया कि नाला विकराल रूप लेने लगा। पहाड़ों से पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा, पत्थर और बोल्डर नीचे की ओर आने लगे।

जलप्रवाह की चपेट में आने से वैली ब्रिज देखते ही देखते बह गया। इसी दौरान मौके पर सड़क निर्माण और मार्ग खोलने के काम में लगी पोकलेन मशीन भी सैलाब के बीच फंस गई। मशीन चला रहे जोगिंदर सिंह के चारों तरफ पानी और मलबा था। स्थिति ऐसी थी कि मशीन से बाहर निकलना बेहद खतरनाक हो सकता था।

बाहर निकलते तो बहा ले जाता सैलाब

जोगिंदर सिंह के मुताबिक, उस समय यदि वह घबराकर मशीन से बाहर निकल जाते तो तेज बहाव उन्हें अपने साथ बहा सकता था। उन्होंने खतरे को भांपते हुए मशीन के भीतर रहना ही सुरक्षित समझा। इसके बाद उन्होंने बेहद सावधानी से मशीन को सुरक्षित दिशा में ले जाने का प्रयास शुरू किया।

कुछ समय तक पोकलेन मशीन जलसैलाब के बीच फंसी रही। चारों तरफ पानी का तेज बहाव, मलबा और बोल्डर थे। इसके बावजूद जोगिंदर सिंह ने नियंत्रण नहीं खोया। करीब एक से डेढ़ मिनट तक चली इस जद्दोजहद के बाद वह मशीन को सुरक्षित स्थान तक निकालने में सफल रहे।

मौत के मुंह से निकलकर फिर सड़क बहाली में जुटे

इस घटना के बाद जोगिंदर सिंह के साहस और सूझबूझ की हर ओर सराहना हो रही है। खास बात यह है कि जलसैलाब की भयावहता को अपनी आंखों से देखने और खुद मौत के मुंह से निकलने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

मंगलवार को जोगिंदर सिंह एक बार फिर सड़क बहाली के काम में जुट गए। जिस पोकलेन मशीन को उन्होंने अपनी सूझबूझ से बचाया था, उसी मशीन से प्रभावित मार्ग को खोलने का काम युद्धस्तर पर जारी रहा।

कोतवाल ने की साहस की सराहना

घटना के बाद ज्योतिर्मठ कोतवाल देवेंद्र सिंह रावत ने जोगिंदर सिंह से मुलाकात की और उनके साहस एवं सूझबूझ की सराहना की। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में जोगिंदर सिंह ने जिस तरह धैर्य बनाए रखा, वह काबिले तारीफ है।

पोकलेन मशीन का सुरक्षित बचना भी राहत और पुनर्बहाली के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आपदा प्रभावित क्षेत्र में सड़कें खोलने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए भारी मशीनरी की जरूरत है। यदि यह मशीन भी सैलाब में बह जाती तो सड़क बहाली के कार्य में और मुश्किलें खड़ी हो सकती थीं।

जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं जोगिंदर सिंह

जानकारी के अनुसार जोगिंदर सिंह मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं और लंबे समय से पोकलेन मशीन ऑपरेटर के रूप में कार्य कर रहे हैं। तमक नाले में आई आपदा के दौरान उनकी सूझबूझ और हिम्मत अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

एक ओर जहां सोमवार को उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए सूझबूझ से फैसला लिया, वहीं मंगलवार को उसी जज्बे के साथ सड़क खोलने के काम में जुट गए। उनका यह हौसला आपदा के बीच काम कर रहे अन्य कर्मचारियों के लिए भी मिसाल बन गया है।

एक कर्मचारी अब भी लापता

तमक नाले में बादल फटने के बाद आई आपदा ने व्यापक नुकसान पहुंचाया है। प्रशासन के अनुसार सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक कर्मचारी अब भी लापता है। उसकी तलाश के लिए प्रशासन, एसडीआरएफ और अन्य बचाव दलों की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

प्रभावित क्षेत्र में राहत, बचाव और सड़क पुनर्बहाली का कार्य लगातार जारी है। प्रशासन की टीमें हालात पर नजर बनाए हुए हैं और मौसम की स्थिति को देखते हुए राहत एवं बचाव अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

मौत सामने थी, लेकिन हौसला उससे बड़ा था

तमक नाले का यह हादसा जहां पहाड़ों में अचानक आने वाले जलसैलाब की भयावहता को सामने लाता है, वहीं जोगिंदर सिंह की कहानी यह भी बताती है कि संकट की घड़ी में घबराने के बजाय सही फैसला लेना जिंदगी और मौत के बीच फर्क पैदा कर सकता है।

एक से डेढ़ मिनट तक मौत के सैलाब के बीच फंसे जोगिंदर सिंह ने न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि उस पोकलेन मशीन को भी सुरक्षित निकाल लिया, जो अब दोबारा आपदा प्रभावित सड़क को खोलने में जुटी है।

About The Author