आखिर किसके संरक्षण में नमभूमि पर बस रहा कंक्रीट का जंगल? एमडीडीए की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

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देहरादून। सहसपुर क्षेत्र के सभावाला रोड पर आसन नदी पुल से पहले स्थित नमभूमि (वेटलैंड) क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की जा रही कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर एमडीडीए की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। क्षेत्र में करीब 400 से 500 बीघा भूमि पर प्लाटिंग कर कंक्रीट का जंगल बसाने की तैयारी की चर्चा है, लेकिन केस दर्ज होने के बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार जिस भूमि पर प्लाटिंग की जा रही है, वहां कुछ फीट की खुदाई में ही पानी निकल आता है और कई स्थानों पर आज भी भूमिगत जल स्रोत सक्रिय हैं। बरसात के मौसम में यह क्षेत्र जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से जूझता रहा है। इसके बावजूद यहां तेजी से सड़कें बनाई गई हैं और मकानों का निर्माण भी शुरू हो चुका है।

आरोप है कि प्लाटिंग से पहले बड़ी संख्या में आम के हरे-भरे पेड़ों को काटा गया और 25 से 50 फीट चौड़ी सड़कें तैयार की गईं। इन सड़कों के निर्माण में भारी मात्रा में आरबीएम (RBM) के उपयोग की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में आरबीएम कहां से लाया गया और इसके लिए अनुमति किसने प्रदान की।

विशेषज्ञों का मानना है कि नमभूमि प्राकृतिक जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे क्षेत्रों में निर्माण कार्य भविष्य में भूमि धंसाव, बाढ़, जलभराव और अन्य पर्यावरणीय खतरों को बढ़ा सकता है। आसन नदी के किनारे विकसित किए जा रहे इन भूखंडों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

सबसे बड़ा सवाल एमडीडीए की कार्यप्रणाली को लेकर खड़ा हो रहा है। छोटे निर्माण कार्यों और मामूली अतिक्रमणों पर सख्ती दिखाने वाला विभाग इस विशाल प्लाटिंग परियोजना पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया? क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है या फिर कोई अन्य कारण कार्रवाई में बाधा बन रहा है?

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस प्लाटिंग को प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही कार्य कोई सामान्य व्यक्ति करता तो अब तक सीलिंग और बुलडोजर की कार्रवाई हो चुकी होती।

अब मांग उठ रही है कि एमडीडीए, राजस्व विभाग और पर्यावरण से जुड़े अधिकारी संयुक्त निरीक्षण कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें तथा यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उल्लेखनीय है कि इस संबंध में एमडीडीए के अवर अभियंता सिद्धार्थ सेमवाल से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।

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