दून वैली टाइम्स | देहरादून
उत्तराखंड जल संस्थान में उपनल (UPNL) के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को “समान काम के लिए समान वेतन” देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन इसके साथ एक नई शर्त जोड़ दिए जाने से कर्मचारियों में असंतोष फैल गया है। जल संस्थान प्रबंधन ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि समान वेतन का लाभ पाने वाले कर्मचारियों को एक माह के भीतर विभागीय योग्यता परीक्षा भी देनी होगी।

मुख्य महाप्रबंधक डी.के. सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शासन के निर्देशों के अनुरूप उपनल कर्मचारियों को समान कार्य का समान वेतन दिया जाएगा। हालांकि, जिन पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, उनकी योग्यता के अनुरूप विभागीय परीक्षा पास करना भी आवश्यक होगा। परीक्षा के परिणाम के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
20 हजार से अधिक कर्मचारी होंगे प्रभावित
बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में 20 हजार से अधिक उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि करीब 15 हजार कर्मचारी समान वेतन के दायरे में आने वाले हैं। जल संस्थान में डेटा एंट्री ऑपरेटर, स्टेनो, चतुर्थ श्रेणी सहित विभिन्न पदों पर उपनल कर्मचारियों की तैनाती है। इनमें कई कर्मचारियों को कंप्यूटर टाइपिंग, शॉर्टहैंड और अन्य तकनीकी दक्षता से जुड़ी परीक्षा देनी पड़ सकती है।
एक महीने का दिया गया समय
आदेश के अनुसार संबंधित कर्मचारियों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। इसके बाद विभागीय परीक्षा आयोजित होगी। प्रबंधन का कहना है कि यह प्रक्रिया संबंधित पदों की योग्यता सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है।
कर्मचारियों में नाराजगी
आदेश जारी होते ही कर्मचारियों के बीच असंतोष फैल गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों को अब परीक्षा के नाम पर मानसिक दबाव में डाला जा रहा है। उनका तर्क है कि शासन के समान वेतन संबंधी आदेश में विभागीय परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि यह शर्त नहीं हटाई गई तो इसका विरोध किया जाएगा।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि 20-20 वर्षों से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की कार्यक्षमता पहले ही साबित हो चुकी है, ऐसे में समान वेतन देने के लिए नई परीक्षा की शर्त उचित नहीं है।
क्या है मामला?
उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने उपनल कर्मचारियों को “समान काम के लिए समान वेतन” देने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में जल संस्थान ने आदेश जारी किया, लेकिन विभागीय परीक्षा की शर्त जुड़ने से मामला विवाद का विषय बन गया है। फिलहाल कर्मचारी संगठनों ने इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है।
