देहरादून। प्रदेश में ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के जोखिम को कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से चमोली स्थित सरस्वती ताल और उत्तरकाशी स्थित केदारताल के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के लिए विशेषज्ञ दल मंगलवार को रवाना हुआ। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) में सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने अभियान के लिए विशेषज्ञों को शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान झीलों की वर्तमान स्थिति, जलस्तर, आकार में बदलाव, आसपास के भू-भाग और संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। संभावित खतरे की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय पर चेतावनी पहुंचाने के लिए आधुनिक सेंसर, जलस्तर मापक उपकरण और संचार प्रणालियों को मजबूत किया जाएगा।
आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि ग्लेशियर झीलों से संभावित आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षात्मक एवं जोखिम न्यूनीकरण उपायों पर कार्य किया जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षित निकासी मार्ग, संभावित प्रभावित क्षेत्रों का चिन्हांकन, संचार व्यवस्था और स्थानीय चेतावनी तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलें चिन्हित
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन के अनुसार उत्तराखंड में कुल 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इनमें से चार झीलों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है, जबकि शेष झीलों का चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जा रहा है।
इसी क्रम में सरस्वती ताल और केदारताल का बैथीमेट्री सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसमें झीलों की गहराई, जलस्तर, संभावित खतरे के कारकों तथा डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।
सरस्वती ताल करीब 5700 मीटर और केदारताल करीब 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इन झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कई विशेषज्ञ संस्थानों की संयुक्त टीम
सर्वेक्षण अभियान में यूएसडीएमए, यूएलएमएमसी, बाबा साहनी पुराविज्ञान संस्थान लखनऊ, वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, एनआईएच रुड़की, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के विशेषज्ञ शामिल हैं।
अभियान में रोहित कुमार, निखिल पुनिया, डॉ. विशाल, दीपक भट्ट, डॉ. शेख नवाज अली, शुभजीत घोष, प्रकाश रंजन जेना, डॉ. पिंकी बिष्ट, स्वप्निल बिष्ट, शिव्यांक सिंह नेगी, शिव शंकर यादव, डॉ. शिवानंद मंडराहा सहित एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और दोनों जिलों के अधिकारियों-कर्मचारियों को शामिल किया गया है।
विभिन्न विशेषज्ञ संस्थानों की संयुक्त भागीदारी से ग्लेशियर झीलों की स्थिति, संभावित जोखिम और डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का बहुआयामी वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा।
