दिव्यांगजनों को कानूनी संरक्षकता का मिला अधिकार, 12 मामलों में जिला प्रशासन का बड़ा फैसला

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अब बैंकिंग, पारिवारिक पेंशन और अन्य कानूनी कार्य होंगे आसान, सीडीओ अभिनव शाह की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक

दून वैली टाइम्स | देहरादून | 27 जुलाई

दिव्यांगजनों के सामाजिक, आर्थिक और कानूनी सशक्तीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर सोमवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति एवं स्थानीय स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम-2016 एवं राष्ट्रीय न्यास अधिनियम-1999 के तहत प्राप्त मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया, जिसमें 12 दिव्यांगजनों को विधिक संरक्षकता एवं सीमित संरक्षकता प्रदान करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, बौद्धिक दिव्यांगता और बहु-दिव्यांगता से प्रभावित व्यक्तियों के ऑनलाइन प्राप्त आवेदनों की गहन समीक्षा की गई। स्थानीय स्तरीय समिति ने 08 मामलों में विधिक अभिभावक नियुक्त करने का निर्णय लिया, जबकि दिव्यांगजन अधिकार नियमावली-2019 के तहत गठित जिला स्तरीय समिति ने 04 मामलों में सीमित संरक्षकता प्रदान करने की स्वीकृति दी।

बैंकिंग और कानूनी कार्यों में मिलेगी बड़ी राहत

विधिक संरक्षकता मिलने के बाद ऐसे दिव्यांगजन, जो स्वयं कानूनी रूप से बाध्यकारी निर्णय लेने या अपने वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों का संचालन करने में सक्षम नहीं हैं, अब अपने विधिक अभिभावक अथवा सीमित संरक्षक के माध्यम से बैंक खाते का संचालन, बैंकिंग संबंधी आवश्यक कार्य और अन्य वैधानिक प्रक्रियाएं आसानी से पूरी कर सकेंगे।

पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने का रास्ता भी होगा आसान

बैठक में बताया गया कि ऐसे दिव्यांगजन, जिनके माता-पिता शासकीय सेवा में कार्यरत थे और उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने में कानूनी बाधाएं आ रही थीं, अब विधिक अभिभावक या सीमित संरक्षक के माध्यम से पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन कर सकेंगे। इससे पात्र दिव्यांगजनों को आर्थिक सुरक्षा मिलने के साथ-साथ आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं भी सरल होंगी।

व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश

मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विधिक संरक्षकता एवं सीमित संरक्षकता से जुड़े प्रावधानों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अधिक से अधिक पात्र दिव्यांगजन और उनके परिवार इस व्यवस्था की जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ उठा सकें। उन्होंने संबंधित विभागों को प्रभावी जनजागरूकता अभियान संचालित करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला शासकीय अधिवक्ता, दिव्यांगजन क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

जिला प्रशासन की इस पहल को दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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