आधुनिक तकनीक से आपदा प्रबंधन को मिलेगी नई मजबूती : जिलाधिकारी
देहरादून, 12 अगस्त। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देशन में देहरादून जिले में आपदा प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से और अधिक मजबूत किया जा रहा है। अतिवृष्टि, अचानक जलस्तर बढ़ने और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए जिले के संवेदनशील आपदा क्षेत्रों तथा प्रमुख पर्यटन स्थलों पर हाई डेफिनेशन पीटीजेड (Pan-Tilt-Zoom) कैमरे स्थापित किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन की ओर से सहस्त्रधारा, कार्लीगाड़ और गुच्चूपानी सहित प्रमुख संवेदनशील एवं पर्यटन स्थलों पर इन हाईटेक कैमरों के जरिए 24×7 रियल टाइम निगरानी की व्यवस्था की गई है। इन कैमरों का एक्सेस जिला आपदा परिचालन केंद्र यानी आपदा कंट्रोल रूम में उपलब्ध है। यहां तैनात अधिकारी-कर्मचारी संबंधित क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
अचानक बढ़ते जलस्तर पर रहेगी नजर
हाईटेक पीटीजेड कैमरों की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर में अचानक होने वाली वृद्धि, असामान्य गतिविधियों और संभावित आपदा की स्थिति की तत्काल जानकारी मिल सकेगी। इससे प्रशासन को खतरे का शुरुआती स्तर पर आकलन करने और आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को तुरंत सक्रिय करने में मदद मिलेगी।
विशेष रूप से बरसात के मौसम में नदी-नालों और जलप्रपातों के आसपास अचानक बढ़ने वाले जलस्तर को देखते हुए यह निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पर्यटन स्थलों पर भी बढ़ेगी सुरक्षा
देहरादून के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सहस्त्रधारा, गुच्चूपानी और मालदेवता जैसे क्षेत्रों में रियल टाइम निगरानी से पर्यटकों की गतिविधियों और सुरक्षा पर भी नजर रखी जा सकेगी।
जिला प्रशासन के अनुसार मालदेवता में पीटीजेड कैमरे स्थापित करने का कार्य भी गतिमान है। कैमरों की संख्या और निगरानी व्यवस्था को आवश्यकता के अनुसार आगे और मजबूत किए जाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
कार्लीगाड़ में कैमरे स्थापित
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि प्रारंभिक चरण में सहस्त्रधारा क्षेत्र के आपदा की दृष्टि से संवेदनशील कार्लीगाड़ में पीटीजेड कैमरे स्थापित कर दिए गए हैं। वहीं सहस्त्रधारा, मालदेवता और गुच्चूपानी में पर्यटकों की अधिक आवाजाही को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से संवेदनशील क्षेत्रों की रियल टाइम मॉनिटरिंग जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। तकनीक के माध्यम से आपदा की सूचना जल्द प्राप्त होने पर संभावित नुकसान को कम करने और राहत-बचाव कार्यों को तेजी से संचालित करने में मदद मिलेगी।
अर्ली अलर्ट से लेकर राहत-बचाव तक मिलेगी मदद
जिला प्रशासन की यह पहल आपदा प्रबंधन के पारंपरिक तरीकों के साथ तकनीक को जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। कैमरों से मिलने वाली लाइव जानकारी के आधार पर प्रशासन को अर्ली अलर्ट, त्वरित सूचना और त्वरित राहत-बचाव कार्रवाई में सहायता मिलेगी।
बारिश के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक पैदा होने वाली परिस्थितियों को देखते हुए यह व्यवस्था प्रशासन के लिए अतिरिक्त निगरानी तंत्र के रूप में काम करेगी। इससे न केवल आपदा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
