दून में नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़: इंटास, मैकलियोड्स और डॉ. रेड्डीज के नाम पर बन रहीं थीं स्प्यूरियस दवाएं, यूपी तक फैला नेटवर्क

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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में औषधि नियंत्रण विभाग ने नकली दवाओं के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अवैध दवा निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है। ईस्ट होप टाउन क्षेत्र के ग्राम देवीपुर-परवल स्थित एक किराये के मकान में चल रही इस फैक्ट्री में देश की नामी दवा कंपनियों इंटास, मैकलियोड्स और डॉ. रेड्डीज के नाम से कथित रूप से नकली (स्प्यूरियस) दवाओं का निर्माण और पैकेजिंग की जा रही थी।

छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में तैयार दवाएं, रैपर, पैकिंग बॉक्स, लेबल, पैकेजिंग सामग्री, दवा निर्माण एवं पैकिंग में प्रयुक्त मशीनें और अन्य उपकरण बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में इस पूरे गिरोह के तार उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

आयुक्त के निर्देश पर चल रहा था विशेष अभियान

औषधि नियंत्रण विभाग के अनुसार आयुक्त के आदेश एवं अपर आयुक्त के निर्देशन में पूरे उत्तराखंड में नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत 22 जुलाई 2026 को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर ईस्ट होप टाउन के ग्राम देवीपुर-परवल स्थित मकान पर अचानक छापेमारी की गई।

मामले के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की आशंका पहले ही सामने आने पर उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग को भी कार्रवाई में शामिल किया गया। दोनों राज्यों की संयुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई को अंजाम दिया।

किराये के मकान में चल रही थी फैक्ट्री

जांच में सामने आया कि जिस मकान में नकली दवाओं का निर्माण किया जा रहा था, वह विनय चमोली का है। मकान मालिक ने अधिकारियों को बताया कि मकान के तीन कमरे अमित शर्मा नामक व्यक्ति को किराये पर दिए गए थे। हालांकि मौके पर कोई किरायानामा प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

अब विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि मकान मालिक, किरायेदार और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही।

नामी कंपनियों के नाम पर तैयार हो रही थीं नकली दवाएं

छापेमारी के दौरान Tab. Gabapin-100, Tab. Zoryl M2 और Tab. Cefolac-200 सहित कई चर्चित दवाओं का बड़ा स्टॉक बरामद किया गया।

इसके अलावा अधिकारियों ने मौके से—

  • विभिन्न दवा कंपनियों के रैपर
  • लेबल
  • पैकिंग बॉक्स
  • पैकेजिंग सामग्री
  • सीलिंग एवं पैकिंग मशीनें
  • दवा निर्माण में प्रयुक्त उपकरण

भी जब्त किए हैं।

प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है कि नकली दवाओं को बिल्कुल असली कंपनियों जैसी पैकिंग में तैयार कर बाजार में सप्लाई करने की तैयारी थी।

यूपी समेत कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं नेटवर्क के तार

औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं दिख रहा है। इस गिरोह के तार उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक जुड़े होने की संभावना है।

संयुक्त जांच के माध्यम से अब यह पता लगाया जाएगा कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों में की जा रही थी और इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।

अरुण चौधरी उर्फ टुंडा मुख्य आरोपी

इस पूरे मामले में अरुण चौधरी उर्फ टुंडा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है।

वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मनेंद्र सिंह राणा एवं औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई कर रहे हैं। बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर विस्तृत जांच और पूछताछ शुरू कर दी गई है।

राज्य औषधि नियंत्रक का सख्त संदेश

राज्य औषधि नियंत्रक ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि आयुक्त एवं अपर आयुक्त के स्पष्ट निर्देश हैं कि नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल किसी भी व्यक्ति को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में अन्य राज्यों से जुड़े गिरोहों की संलिप्तता सामने आती है तो संबंधित राज्यों के औषधि नियंत्रण विभागों के समन्वय से उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त अभियान जारी रहेगा।

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार नकली दवाएं केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ हैं। ऐसी दवाओं के सेवन से बीमारी बढ़ सकती है, दवा का असर समाप्त हो सकता है और कई मामलों में मरीज की जान तक जा सकती है। इसलिए नकली दवाओं के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


दून वैली टाइम्स

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