आपदा से तबाह किसानों ने सरकार से लगाई राहत की गुहार

दून वैली टाइम्स | उत्तरकाशी, 3 अगस्त।

उत्तरकाशी जनपद के सीमांत विकासखंड पुरोला, नौगांव और मोरी में हाल ही में आई अतिवृष्टि, भूस्खलन और बाढ़ से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। नगदी फसलों के साथ-साथ धान की फसल भी बर्बाद होने से क्षेत्र के किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। इस बीच प्रभावित क्षेत्र के किसानों एवं कृषक संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन भेजकर तत्काल राहत, मुआवजा और किसान पहचान संख्या (Farmer ID) की अनिवार्यता में अस्थायी राहत देने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकांश किसान कृषि और बागवानी पर निर्भर हैं। हाल की प्राकृतिक आपदा के कारण खेतों में भारी मात्रा में मलबा भर गया, जिससे टमाटर, शिमला मिर्च, नाशपाती जैसी नगदी फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं। इसके अलावा क्षेत्र की प्रमुख खाद्य फसल धान भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरे वर्ष की मेहनत और निवेश कुछ ही घंटों में बर्बाद हो गया।

Farmer ID बना राहत पाने में बाधा

किसानों ने ज्ञापन में बताया कि वर्तमान में सरकारी राहत और मुआवजा प्राप्त करने के लिए Farmer ID अनिवार्य है, लेकिन पुरोला, नौगांव और मोरी जैसे दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में इंटरनेट और सर्वर की समस्या पहले से बनी रहती है। आपदा के बाद संचार व्यवस्था प्रभावित होने से किसान अपनी Farmer ID अपडेट या पंजीकृत नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में अनेक पात्र किसान राहत योजनाओं से वंचित होने की आशंका जता रहे हैं।

सरकार से कीं ये प्रमुख मांगें

किसानों और कृषक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि—

– राजस्व, कृषि और उद्यान विभाग की संयुक्त टीम बनाकर प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल स्थलीय सर्वे (गिरदावरी) कराया जाए।
– राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के प्रावधानों के अनुसार प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए।
– वर्तमान आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए Farmer ID की अनिवार्यता में अस्थायी ढील दी जाए, ताकि कोई भी किसान राहत से वंचित न रहे।
– किसानों के कृषि ऋण (KCC) की किस्तों को स्थगित किया जाए तथा ब्याज माफी पर भी सरकार विचार करे।

सरकार से त्वरित कार्रवाई की अपील

ज्ञापन में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदा ने सीमांत क्षेत्रों के किसानों की आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। ऐसे में सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए शीघ्र राहत पैकेज घोषित करे और प्रभावित किसानों तक बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करे।

इस ज्ञापन की प्रतिलिपि कृषि एवं उद्यान मंत्री, उत्तराखंड तथा जिलाधिकारी, उत्तरकाशी को भी भेजी गई है।

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