महेंद्र भट्ट ने शुद्धिकरण को ठहराया उचित, कांग्रेस ने उठाए जातीय भेदभाव के सवाल; नड्डा के ‘खेद’ के बाद भी जारी है सियासी घमासान

देहरादून। हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद रामलीला मैदान में कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर उत्तराखंड की सियासत गरमा गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा इस घटना पर राज्यसभा में खेद जताए जाने के बाद अब उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान ने विवाद को फिर हवा दे दी है। भट्ट ने शुद्धिकरण की कार्रवाई का बचाव करते हुए इसे किसी व्यक्ति या अनुसूचित जाति से जोड़ने को गलत बताया है।
भट्ट बोले—रामलीला मैदान ‘दूषित’ हुआ था
मसूरी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान महेंद्र भट्ट ने कहा कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा हुई थी। उनके मुताबिक, वहां ऐसे नारे लगाए गए जो धार्मिक स्थल की गरिमा के अनुरूप नहीं थे और कथित रूप से गंदगी फैली थी। इसी वजह से मैदान का शुद्धिकरण किया गया।
भट्ट ने यह भी कहा कि शुद्धिकरण किसी अनुसूचित जाति के व्यक्ति को निशाना बनाकर नहीं किया गया था और इस पूरे मामले को जातिगत राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।
नड्डा ने संसद में जताया था खेद
इस विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को हल्द्वानी में मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद हुई कथित शुद्धिकरण की घटना से हुई। खरगे ने इस मामले को राज्यसभा में उठाते हुए इसे अपने अपमान से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सदन में घटना को लेकर खेद जताया और कहा था कि भाजपा इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। साथ ही मामले की जांच की बात कही गई थी।
कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
महेंद्र भट्ट के बयान के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि नड्डा द्वारा घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताने के बावजूद उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष द्वारा उसका बचाव किया जाना भाजपा के रुख में विरोधाभास को दिखाता है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि भाजपा राष्ट्रीय नेतृत्व इस घटना से खुद को अलग बता रहा है, तो फिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष द्वारा शुद्धिकरण को सही ठहराए जाने पर पार्टी क्या कार्रवाई करेगी। कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे प्रकरण को दलित सम्मान, सामाजिक समानता और छुआछूत की मानसिकता से जोड़ते हुए भाजपा और आरएसएस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भाजपा का दावा—पार्टी कार्यकर्ता शामिल नहीं
विवाद के बीच भाजपा की ओर से यह भी कहा गया है कि कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम में भाजपा का कोई कार्यकर्ता शामिल नहीं था। महेंद्र भट्ट के हवाले से सामने आई रिपोर्टों में पार्टी स्तर पर मामले की जांच किए जाने और भाजपा की प्रत्यक्ष भूमिका से इनकार की बात सामने आई है। ऐसे में एक तरफ भाजपा संगठन घटना से दूरी बना रहा है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट शुद्धिकरण की कार्रवाई के औचित्य का बचाव कर रहे हैं।
अब मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़ा
शुद्धिकरण विवाद अब केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे सामाजिक समानता और दलित सम्मान का मुद्दा बनाकर भाजपा को घेर रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि कांग्रेस धार्मिक स्थल की गरिमा से जुड़े मामले को राजनीतिक रंग दे रही है।
29 अगस्त को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महेंद्र भट्ट के आवास का घेराव कर प्रदर्शन भी किया। वहीं कांग्रेस की ओर से इस मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर शुद्धिकरण किसका और क्यों?
पूरे विवाद में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में हुआ कथित शुद्धिकरण वास्तव में किस उद्देश्य से कराया गया था और इसमें कौन लोग शामिल थे। भाजपा जहां इसे सफाई और धार्मिक स्थल की गरिमा से जोड़कर देख रही है, वहीं कांग्रेस इसे खरगे के कार्यक्रम के बाद की गई ऐसी कार्रवाई बता रही है, जिसने जातीय भेदभाव और सामाजिक समानता पर सवाल खड़े किए हैं।
