ऋषिकेश | Doon Valley Times
ऋषिकेश-भानियावाला राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के विरोध में बुधवार को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) कार्यालय के बाहर स्थानीय नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और युवाओं ने विशाल प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेते हुए पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर कड़ा विरोध जताया और पर्यावरण संरक्षण के पक्ष में जोरदार आवाज उठाई।

प्रदर्शन में विशेष रूप से युवा पीढ़ी और छात्रों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने एनएचएआई और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की तथा जनगीत गाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान वक्ताओं ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मुख्य वक्ता अनूप नौटियाल ने कहा कि ऋषिकेश-देहरादून मार्ग पर ट्रैफिक की ऐसी कोई स्थिति नहीं है, जिसके लिए सड़क को इतना चौड़ा करना आवश्यक हो। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस मार्ग पर नियमित जाम की समस्या नहीं है, तो हजारों पेड़ों की कटाई का औचित्य क्या है।
पर्यावरण कार्यकर्ता हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि यह क्षेत्र हाथियों का प्राकृतिक आवास और महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 के मधुमलाई फैसले में हाथी कॉरिडोर के संरक्षण पर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इस परियोजना से संबंधित एक मामला अभी न्यायालय में लंबित है, ऐसे में पेड़ों की कटाई में जल्दबाजी उचित नहीं है।
प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता मयंक दत्ता ने दावा किया कि परियोजना से जुड़े दस्तावेजों के अध्ययन में सड़क चौड़ीकरण का प्रमुख औचित्य वीआईपी मूवमेंट बताया गया है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ वीआईपी लोगों की सुविधा के लिए 4,400 से अधिक परिपक्व पेड़ों की बलि दी जा रही है, जो पर्यावरण और वन्यजीवों के हित में नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विकास कार्य पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन के हितों की अनदेखी करने वाली नीतियों का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा।
लगातार हो रही नारेबाजी के बीच एनएचएआई के निदेशक सौरभ सिंह कार्यालय से बाहर आए और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर पेड़ कटान से संबंधित सभी स्वीकृतियों एवं आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।
कार्यक्रम में इरा चौहान, लोकेश ओरी, भीम पाली, विजय भट्ट सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।




