इस महिला की एंट्री से रेखा आर्य–गिरधारी साहू के रिश्तों में बढ़ी दरार? 2024 के कल्पना प्रकरण से हत्या की साजिश के आरोपों तक पहुंचा विवाद

अक्टूबर 2026 में पति के खिलाफ FIR के बाद फिर सुर्खियों में आया पुराना मामला; कथित ऑडियो की सत्यता, वैवाहिक स्थिति और दस्तावेजों की जांच पर टिकी निगाहें

देहरादून/बरेली। उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच पारिवारिक विवाद अब सार्वजनिक और कानूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। 15 अक्टूबर 2026 को रेखा आर्य की शिकायत पर देहरादून के कैंट थाने में उनके पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। शिकायत में कथित वैवाहिक धोखाधड़ी, मारपीट, जातिसूचक अपमान, जालसाजी, धमकी और हत्या की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, गिरधारी साहू ने भी सार्वजनिक रूप से पलटवार करते हुए आरोपों को गलत बताया है और कथित ऑडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए हैं। इस बीच, वर्ष 2024 में बरेली में कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी के खिलाफ दर्ज कराए गए मुकदमे की चर्चा भी फिर तेज हो गई है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पुराने मामले और वर्तमान वैवाहिक विवाद के बीच वास्तविक संबंध क्या है? क्या दस्तावेजों में पति का नाम दर्ज होने को लेकर शुरू हुआ विवाद दांपत्य संबंधों में तनाव की एक कड़ी था, या दोनों घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग हैं? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इनके बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति पुराने मुकदमे के अभिलेखों, संबंधित दस्तावेजों, दोनों पक्षों के बयानों और पुलिस जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।

2024 में सामने आया था कल्पना मिश्रा का मामला

रेखा आर्य ने सितंबर 2024 में बरेली के बारादरी थाने में कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी और उनसे जुड़े एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उस समय मंत्री ने आरोप लगाया था कि संबंधित महिला ने आधार कार्ड, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम अपने पति के रूप में दर्ज कराया था। शिकायत में बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किए जाने का आरोप भी लगाया गया था।

मंत्री की शिकायत के अनुसार, महिला पर उनके बरेली स्थित आवास से सात लाख रुपये और स्वर्ण जड़ित रुद्राक्ष की माला ले जाने का आरोप भी था। इसके अतिरिक्त, उन्होंने आरोप लगाया था कि संबंधित महिला हुंडई क्रेटा कार का इस्तेमाल करती थी, जिस पर कथित तौर पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगाई गई थी।

इस मामले में डॉ. आरसी पांडे का नाम भी शिकायत में सामने आया था। रेखा आर्य ने संबंधित लोगों पर उनके और उनके पति के नाम तथा पते के कथित दुरुपयोग सहित अन्य गंभीर आरोप लगाए थे। उस समय बरेली पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई की पुष्टि की थी। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति का निर्धारण संबंधित मुकदमे के अभिलेखों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जाना चाहिए। यहां यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि शिकायत में लगाए गए आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं हैं।

सितंबर 2024 का यह प्रकरण इसलिए भी चर्चा में आया था क्योंकि इसमें मंत्री के पति का नाम दूसरी महिला के दस्तावेजों में पति के रूप में दर्ज होने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, उस घटना से वर्तमान वैवाहिक विवाद की शुरुआत हुई थी, ऐसा निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध होना आवश्यक है।

दो साल बाद पति के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर

15 अक्टूबर 2026 को रेखा आर्य ने देहरादून के कैंट थाने में अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की। मामले में वैवाहिक स्थिति छिपाने, कथित मारपीट, गाली-गलौज, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल, धमकी और कंपनी के दस्तावेजों में कथित जालसाजी जैसे आरोप शामिल हैं।

रेखा आर्य के अनुसार, उनका विवाह 6 जुलाई 2004 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाह के समय गिरधारी साहू ने अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी और बाद में उन्हें पता चला कि उनके पति पहले से विवाहित थे तथा उनके बच्चे भी थे।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पति के अन्य महिलाओं से कथित संबंधों का विरोध करने पर उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। मंत्री का दावा है कि शुरुआत में पति ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए मौखिक और लिखित रूप से माफी मांगी, लेकिन इसके बाद भी कथित व्यवहार में बदलाव नहीं आया।

रेखा आर्य ने अपने सरकारी आवास पर स्टाफ की मौजूदगी में जातिसूचक शब्दों से अपमानित किए जाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने अपनी और अपने नाबालिग बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।

कंपनी के दस्तावेजों में कथित जालसाजी का आरोप

मंत्री की शिकायत का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू कंपनी के निदेशक पद से हटाने से जुड़ा है। रेखा आर्य ने आरोप लगाया कि उनके कथित फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके उन्हें कंपनी के निदेशक पद से हटाया गया, जबकि उन्होंने न तो संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे और न ही पद छोड़ने के लिए कोई त्यागपत्र दिया था।

यदि यह आरोप प्रमाणित होता है, तो संबंधित दस्तावेजों की प्रामाणिकता, हस्ताक्षरों की जांच और कंपनी के आधिकारिक रिकॉर्ड महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। हालांकि, अभी इसे शिकायत में लगाया गया आरोप ही माना जाना चाहिए।

मामले में आपराधिक साजिश, मारपीट, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक धमकी और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख मीडिया रिपोर्टों में किया गया है। धाराओं की सटीक पुष्टि एफआईआर की प्रमाणित प्रति से की जानी चाहिए।

कथित ऑडियो ने बढ़ाई मामले की गंभीरता

इस विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू वह ऑडियो रिकॉर्डिंग है, जिसे रेखा आर्य ने सार्वजनिक किया। मंत्री का आरोप है कि रिकॉर्डिंग में गिरधारी साहू एक महिला से बातचीत के दौरान उन्हें जान से मारने की साजिश से संबंधित बातें करते सुनाई देते हैं। उन्होंने इस आधार पर अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई।

एफआईआर दर्ज कराने के बाद रेखा आर्य ने सोशल मीडिया पर वीडियो और कथित ऑडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन से जुड़ी पीड़ा व्यक्त की और कहा कि बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पुलिस से संपर्क करने का फैसला लिया।

उन्होंने महिलाओं से घरेलू उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने की अपील भी की। उनका संदेश था कि महिला सामान्य हो या सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली, उसे घरेलू अत्याचार सहने के बजाय उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।

हालांकि, ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाजों की पहचान, रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता, उसमें कही गई बातों का संदर्भ और किसी कथित साजिश की वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है। किसी ऑडियो के सार्वजनिक हो जाने मात्र से उसमें लगाए गए आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। डिजिटल फॉरेंसिक जांच इस मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।

गिरधारी साहू का पलटवार, ऑडियो को बताया फर्जी

रेखा आर्य की शिकायत और कथित ऑडियो सार्वजनिक होने के बाद गिरधारी लाल साहू ने भी वीडियो जारी कर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोपों को गलत और निराधार बताया तथा मंत्री के राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए दावा किया कि उन्होंने उनकी राजनीतिक सफलता में भूमिका निभाई है।

16 अक्टूबर को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, साहू ने कथित ऑडियो को फर्जी बताते हुए उसके एआई से तैयार किए जाने का दावा किया। उन्होंने रेखा आर्य पर लगभग 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति अर्जित करने का आरोप भी लगाया और जांच की मांग की। ये साहू की ओर से लगाए गए प्रत्यारोप हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि भी आवश्यक है।

इस प्रकार विवाद अब दोनों पक्षों के आरोपों और प्रत्यारोपों तक पहुंच गया है। एक ओर रेखा आर्य ने अपनी सुरक्षा, कथित उत्पीड़न और दस्तावेजों में जालसाजी की शिकायत की है, वहीं दूसरी ओर गिरधारी साहू ने आरोपों को खारिज करते हुए ऑडियो और मंत्री की कथित संपत्ति पर सवाल उठाए हैं।

वैवाहिक पृष्ठभूमि पर भी उठे सवाल

रेखा आर्य की शिकायत में विवाह के समय गिरधारी साहू की कथित वैवाहिक स्थिति छिपाए जाने का आरोप है। यह आरोप मामले की कानूनी पड़ताल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, पहले के वैवाहिक संबंधों, विवाह की परिस्थितियों और संबंधित दस्तावेजों के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले प्रमाणित रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

विवाद की पृष्ठभूमि में परिवार से संबंधित विभिन्न दावे और विवरण भी सार्वजनिक चर्चा में हैं। लेकिन परिवार के सदस्यों, उनकी निजी परिस्थितियों या संपत्तियों के बारे में अपुष्ट सूचनाओं को मौजूदा एफआईआर के आरोपों का प्रमाण नहीं माना जा सकता। किसी व्यक्ति के पारिवारिक इतिहास या संपत्ति का उल्लेख अपने आप में किसी अपराध को सिद्ध नहीं करता।

इसी तरह, गिरधारी साहू से जुड़े पुराने आपराधिक मामलों के संदर्भ में भी सावधानी आवश्यक है। किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना और अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाना अलग-अलग बातें हैं। प्रत्येक मामले की वर्तमान स्थिति, आरोपपत्र, जमानत और न्यायिक आदेशों की अलग से पुष्टि किए बिना किसी को दोषी घोषित करना उचित नहीं होगा।

अब पुलिस जांच से खुलेगी विवाद की परतें

रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद की जांच में कई बिंदु महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इनमें वर्ष 2024 के बरेली प्रकरण के दस्तावेज, विवाह से संबंधित रिकॉर्ड, कथित मारपीट और धमकियों के आरोप, कंपनी के दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता तथा सार्वजनिक किए गए ऑडियो की डिजिटल फॉरेंसिक जांच शामिल हैं।

इसके साथ ही, दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण जरूरी होगा। यदि जांच में किसी आरोप के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जिन आरोपों की पुष्टि नहीं होती, उनके बारे में भी स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।

फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि सितंबर 2024 में कल्पना मिश्रा/चतुर्वेदी से जुड़े दस्तावेजों के विवाद और अक्टूबर 2026 में पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बीच वास्तविक संबंध क्या है। क्या दोनों घटनाएं एक ही पारिवारिक विवाद की अलग-अलग कड़ियां हैं या इनके पीछे अलग परिस्थितियां हैं—इसका उत्तर पुलिस जांच और प्रमाणित दस्तावेजों से ही सामने आ सकेगा।

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