गिरफ्तारी पर रोक और मुकदमा निरस्त करने की याचिका दूसरी पीठ को भेजी गई, न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई सुनवाई
दून वैली टाइम्स | नैनीताल/देहरादून
नैनीताल। उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू को नैनीताल हाईकोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने मामले को दूसरी पीठ के समक्ष भेज दिया है। यह सुनवाई बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई।
मामले में गिरधारी लाल साहू की ओर से याचिका दायर कर उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कहा गया कि उन्हें झूठे मामले में फंसाया गया है। हालांकि, अदालत से फिलहाल उन्हें कोई राहत नहीं मिली और मामले को आगे की सुनवाई के लिए दूसरी पीठ को भेज दिया गया।
रेखा आर्य की शिकायत पर दर्ज हुआ है मुकदमा
मामले के अनुसार, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने कथित धोखाधड़ी, मारपीट, धमकी, जातिसूचक टिप्पणी और हस्ताक्षरों में जालसाजी सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की जांच की जा रही है। <Cite refs={[“turn472116search6”,“turn472116search5”]}/>
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि साहू ने विवाह के समय अपनी वैवाहिक स्थिति छिपाई थी। रेखा आर्य के अनुसार, उनका विवाह वर्ष 2004 में हुआ था और बाद में उन्हें कथित तौर पर पता चला कि साहू पहले से विवाहित थे।
याचिकाकर्ता ने आरोपों को बताया गलत
दूसरी ओर, गिरधारी लाल साहू की ओर से याचिका में कहा गया कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और उन्हें गलत तरीके से फंसाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2004 में विवाह के बाद से वह रेखा आर्य के साथ रह रहे हैं।
साहू की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि मंत्री बनने के बाद रेखा आर्य ने कथित तौर पर 210 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। यह याचिकाकर्ता की ओर से लगाया गया आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
अब दूसरी पीठ में होगी सुनवाई
हाईकोर्ट में फिलहाल याचिका पर मांगी गई राहत नहीं मिली है। मामले को दूसरी पीठ के पास भेजे जाने के बाद आगे की सुनवाई उसी के समक्ष होनी है। इस स्तर पर अदालत द्वारा मुकदमा निरस्त करने या गिरफ्तारी पर रोक लगाने के संबंध में अंतिम निर्णय दिए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
