हल्द्वानी में तीन माह की मासूम की दर्दनाक मौत, श्वास नली में दूध फंसने से नहीं बच सकी जान; डॉक्टरों ने बरतने को कहा एहतियात

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दून वैली टाइम्स | हल्द्वानी | 29 जुलाई

उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। बरेली रोड स्थित मोरारजी क्षेत्र में महज तीन माह की एक मासूम बच्ची की श्वास नली में दूध फंस जाने से मौत हो गई। परिजन गंभीर हालत में बच्ची को तत्काल सुशीला तिवारी (एसटीएच) अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने लगातार दो दिनों तक उसका उपचार किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस दर्दनाक घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

दूध पिलाने के दौरान अचानक बिगड़ी तबीयत

प्राप्त जानकारी के अनुसार मोरारजी क्षेत्र निवासी राकेश की पत्नी अपनी तीन माह की बेटी दृष्टि को बिस्तर पर लेटाकर दूध पिला रही थीं। इसी दौरान बच्ची को अचानक उल्टी हुई और उसकी सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई। देखते ही देखते उसकी हालत गंभीर हो गई। घबराए परिजन बिना समय गंवाए उसे सुशीला तिवारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तत्काल भर्ती कर उपचार शुरू किया।

दो दिन तक चला इलाज, नहीं बच सकी मासूम की जिंदगी

अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने लगातार दो दिनों तक बच्ची की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए। परिवार को उम्मीद थी कि उनकी बेटी स्वस्थ होकर घर लौटेगी, लेकिन रविवार रात उपचार के दौरान उसने अंतिम सांस ले ली। चिकित्सकों के अनुसार, बच्ची की श्वास नली में दूध चले जाने के कारण सांस लेने का रास्ता अवरुद्ध हो गया था, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

पोस्टमार्टम नहीं कराने का लिया फैसला

घटना के बाद परिजनों ने बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं कराने की इच्छा जताई। इसके लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया। अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए बच्ची का शव परिजनों को सौंप दिया।

परिवार में पसरा मातम

जिस घर में कुछ दिन पहले तक मासूम की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब केवल सन्नाटा और मातम पसरा है। मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पिता और अन्य परिजन भी इस असहनीय दुख से उबर नहीं पा रहे हैं। मोहल्ले के लोगों ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

डॉक्टरों ने अभिभावकों को दी महत्वपूर्ण सलाह

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि नवजात और छोटे बच्चों को दूध पिलाते समय विशेष सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है। कई बार बच्चे को लेटाकर या अधिक मात्रा में दूध पिलाने से उल्टी हो सकती है और वही दूध गलती से श्वास नली के रास्ते फेफड़ों में पहुंच सकता है, जिससे सांस रुकने या गंभीर संक्रमण की स्थिति बन सकती है।

उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि—

  • शिशु को दूध पिलाने के बाद कुछ समय तक कंधे पर सीधा रखकर डकार जरूर दिलाएं।
  • दूध पिलाते समय बच्चे को पूरी तरह सपाट न लिटाएं।
  • अत्यधिक मुलायम तकिए का उपयोग न करें।
  • यदि बच्चा दूध पीने से मना करे, सुस्त दिखाई दे या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • किसी भी आपात स्थिति में बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचें।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात शिशुओं की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। सही तरीके से दूध पिलाना, समय पर डकार दिलाना और बच्चे की सांस पर लगातार नजर रखना ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए बेहद जरूरी है।

— दून वैली टाइम्स

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