नई दिल्ली। नीट पेपर लीक, परीक्षा में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की एडवाइजरी ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने विश्वविद्यालय की एडवाइजरी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने से डराने-धमकाने की कोशिश की जा रही है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए धमकाने की हिम्मत कैसे हुई? ध्यान रहे, जब समय आएगा तो आप ही जवाबदेह होंगे।” उनके इस बयान के बाद छात्र आंदोलन और विश्वविद्यालय प्रशासन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
जंतर-मंतर पर जारी है छात्र आंदोलन
नीट पेपर लीक और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के विरोध में छात्र कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष भी केंद्र सरकार पर लगातार निशाना साध रहा है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने छात्रों के लिए जारी एडवाइजरी में कहा कि जंतर-मंतर पर होने वाली किसी भी अवैध सभा या प्रदर्शन में शामिल होने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। विश्वविद्यालय ने छात्रों से अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने, कानून का पालन करने और जंतर-मंतर से दूर रहने की सलाह दी।
एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि ऐसे प्रदर्शनों में शामिल होने से छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा के साथ-साथ उनके शैक्षणिक और भविष्य के पेशेवर अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं। साथ ही सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक और फर्जी सूचनाओं से सावधान रहने की अपील की गई।
JNU ने भी जारी की एडवाइजरी
दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने भी अपने छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी की। विश्वविद्यालय ने छात्रों से जिम्मेदारीपूर्वक आचरण करने, व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता देने और जंतर-मंतर या उसके आसपास आयोजित किसी भी सभा या प्रदर्शन में भाग लेने से बचने की सलाह दी।
जेएनयू ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई छात्र लागू कानूनों या विश्वविद्यालय की आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन, विश्वविद्यालयों की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।




