देहरादून। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को करीब चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अंकिता का परिवार आज भी अपनी बेटी के लिए पूर्ण न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो दिन पहले अंकिता भंडारी के परिवार से मुलाकात कर उनका हाल जाना और न्याय की लड़ाई में उनके साथ खड़े होने की बात कही।
19 वर्षीय अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। अंकिता का शव 24 सितंबर 2022 को ऋषिकेश के समीप चीला नहर से बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डूबने को मौत का कारण बताया गया था और शरीर पर चोटों के निशान भी पाए गए थे।

मामले की जांच के दौरान एक कथित वीआईपी मेहमान को लेकर गंभीर सवाल सामने आए थे। आरोप था कि अंकिता पर उक्त वीआईपी को विशेष सेवाएं देने का दबाव बनाया गया था और इसका विरोध करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि इस कथित वीआईपी की पहचान और उसकी भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
अंकिता के परिवार सहित विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार मांग की जाती रही है कि कथित वीआईपी की पहचान सार्वजनिक की जाए और उसकी भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार ने इस मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद सीबीआई ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
अंकिता हत्याकांड में वनंतरा रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य सहित तीन आरोपियों को अदालत ने दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि कथित वीआईपी की पहचान और इस मामले में उसकी संभावित भूमिका का सवाल अभी भी जांच के दायरे में है।
मामले की शुरुआत में वनंतरा रिजॉर्ट के एक हिस्से को ध्वस्त किए जाने को लेकर भी सवाल उठे थे। अंकिता के परिवार ने आशंका जताई थी कि रिजॉर्ट को ध्वस्त किए जाने से महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रभावित हो सकते हैं। इस कार्रवाई को लेकर भी उस समय प्रशासन और सरकार से कई सवाल पूछे गए थे।
राहुल गांधी के अंकिता के परिवार से मिलने के बाद एक बार फिर यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए।
कांग्रेस लंबे समय से आरोप लगाती रही है कि अंकिता मामले में कथित वीआईपी की पहचान सामने आनी चाहिए। पार्टी का कहना है कि यदि किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, कथित वीआईपी की भूमिका से जुड़े आरोपों का अंतिम सच जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे उत्तराखंड को झकझोर दिया था। चार साल बाद भी परिवार की सबसे बड़ी मांग यही है कि उनकी बेटी की हत्या के पीछे का पूरा सच सामने आए और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही है तो उसे भी कानून के दायरे में लाया जाए। अब सीबीआई जांच से परिवार और प्रदेशवासियों को उम्मीद है कि कथित वीआईपी से जुड़े सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।
