पीपलकोटी टीएचडीसी हादसे पर यूकेडी ने उठाए गंभीर सवाल, 10 दिन में लिखित जवाब की मांग

चमोली। पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की पीपलकोटी–सियासैंण परियोजना में 13 अगस्त को हुए हादसे को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने टीएचडीसी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूकेडी के प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना स्थल पर पहुंचकर हादसे की परिस्थितियों, श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था और परियोजना में लागू सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी मांगी। दल ने स्पष्ट किया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर श्रमिकों और स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यूकेडी प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना स्थल पर पहुंचकर टीएचडीसी अधिकारियों के समक्ष हादसे से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल रखे। विरोध के दौरान टीएचडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजय वर्मा भी मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल की मांगों एवं सवालों को सुना।

टनल में मौजूद श्रमिकों का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग

यूकेडी ने हादसे के समय टनल के अंदर मौजूद श्रमिकों की वास्तविक संख्या को लेकर सवाल उठाया। दल ने मांग की कि घटना के समय टनल के अंदर कितने कर्मचारी और श्रमिक मौजूद थे, कितने लोग किस समय टनल में दाखिल हुए और कौन-कौन बाहर निकला, इसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

इसके साथ ही प्रत्येक श्रमिक की रियल टाइम लोकेशन से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड और परियोजना के एंट्री-एग्जिट सिस्टम की जानकारी भी सामने रखने की मांग की गई, ताकि हादसे के दौरान सुरक्षा प्रबंधन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

भूगर्भीय संवेदनशीलता को लेकर भी सवाल

यूकेडी ने हादसे वाले क्षेत्र की भूगर्भीय स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। दल ने पूछा कि क्या परियोजना के इस हिस्से को पहले से भूगर्भीय सर्वेक्षण में संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रोब ड्रिलिंग, जियो-टेक्निकल जांच, जमीन की हलचल और पानी के रिसाव की निगरानी से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। इसके अलावा टनल में सुरक्षा के लिए लगाए गए उपकरणों, सेफ्टी अलार्म, इमरजेंसी एस्केप सिस्टम और एस्केप टनल की उपलब्धता तथा उनकी कार्यशील स्थिति की जानकारी भी मांगी गई।

स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट पर मांगा जवाब

यूकेडी ने सवाल किया कि टनल का अंतिम स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट कब किया गया था और उसमें क्या निष्कर्ष सामने आए थे। यदि निर्माण क्षेत्र में जमीन के मूवमेंट, दरार, भूस्खलन अथवा अन्य किसी तरह के खतरे के संकेत पहले ही मिल गए थे तो निर्माण कार्य को समय रहते क्यों नहीं रोका गया।

दल ने यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि हादसे के समय श्रमिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी टीएचडीसी की थी या कार्यदायी संस्था की और सुरक्षा मानकों की निगरानी के लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार था।

सेफ्टी ऑफिसर की रिपोर्ट और मॉक ड्रिल की जानकारी मांगी

यूकेडी ने परियोजना में तैनात सेफ्टी ऑफिसर की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही स्वतंत्र सेफ्टी ऑडिट कब-कब कराया गया और उसकी रिपोर्ट में किन सुरक्षा कमियों अथवा सुधारों का उल्लेख किया गया, इसकी जानकारी भी मांगी गई।

प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना में पूर्व में कराए गए इमरजेंसी इवैक्यूएशन मॉक ड्रिल का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक करने को कहा। यूकेडी का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होगा कि किसी आपात स्थिति में श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए परियोजना प्रबंधन कितना तैयार था।

जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की निरीक्षण रिपोर्ट भी मांगी

यूकेडी ने जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। दल ने मांग की कि परियोजना स्थल का पूर्व में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा किए गए सुरक्षा निरीक्षणों की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

यूकेडी ने पूछा कि यदि परियोजना स्थल का समय-समय पर निरीक्षण किया गया था तो निरीक्षण के दौरान सुरक्षा संबंधी क्या कमियां सामने आई थीं और उन पर क्या कार्रवाई की गई।

मृत श्रमिकों के परिजनों को एक करोड़ मुआवजे की मांग

हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों के लिए यूकेडी ने कम से कम एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है। वहीं गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को भी न्यायोचित एवं पर्याप्त मुआवजा दिए जाने की मांग की गई।

दल ने कहा कि हादसे के बाद केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों की दीर्घकालिक सुरक्षा और पुनर्वास की भी व्यवस्था की जानी चाहिए।

सभी निर्माणाधीन टनलों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग

यूकेडी ने पीपलकोटी–सियासैंण परियोजना की सभी निर्माणाधीन टनलों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। दल ने कहा कि जब तक सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक जोखिम वाले निर्माण कार्यों को रोकने पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

HCC की पूर्व परियोजनाओं और डंपिंग के मामलों का मुद्दा उठाया

प्रतिनिधिमंडल ने कार्यदायी संस्था HCC से जुड़ी पूर्व की परियोजनाओं में कथित लापरवाही का मुद्दा भी उठाया। इसके साथ ही टीएचडीसी और एनटीपीसी से जुड़ी कार्यदायी संस्थाओं के खिलाफ अवैध डंपिंग समेत अन्य शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का सवाल भी अधिकारियों के सामने रखा गया।

यूकेडी ने इन मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

कर्मचारियों के बीमा की मांग पर कार्रवाई का आश्वासन

यूकेडी ने उपनल के माध्यम से परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों का बीमा कराने की मांग भी रखी। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि जोखिम वाले कार्यों में लगे कर्मचारियों और श्रमिकों को पर्याप्त बीमा सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में उनके परिवारों को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े।

इस मांग पर टीएचडीसी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजय वर्मा ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया।

प्रभावित गांव हाट को सड़क से जोड़ने की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने हादसे और परियोजना क्षेत्र से जुड़े स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं को भी उठाया। यूकेडी ने प्रभावित गांव हाट को सेमलडाला–पीपलकोटी मोटर मार्ग से जोड़ने की मांग रखी, ताकि ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिल सके और आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य भी तेजी से संचालित किया जा सके।

10 दिन में लिखित जवाब नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी

यूकेडी ने टीएचडीसी प्रबंधन से हादसे से जुड़े सभी सवालों और रखी गई मांगों पर 10 दिन के भीतर लिखित जवाब देने की मांग की है। दल ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो व्यापक आंदोलन और विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

यूकेडी ने कहा कि परियोजनाओं के निर्माण और विकास के नाम पर श्रमिकों की जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता। हादसे की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाना आवश्यक है।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे मौजूद

इस दौरान यूकेडी जिला अध्यक्ष युधवीर सिंह नेगी, केंद्रीय महामंत्री बृजमोहन सजवाण, वरिष्ठ नेता कमल किशोर डिमरी, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी सर्वेश्वर पुरोहित सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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