उत्तराखण्ड में अनोखा मामला: 2 साल का बकरा दे रहा दूध

साइंस भी हो गया फेल, कुदरत का गजब खेल, सेलाकुई में देखने उमड़ रही लोगों की भीड़

दून वैली टाइम्स | देहरादून

उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र से एक बेहद अनोखा और दुर्लभ मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पशुपालन विशेषज्ञों का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आमतौर पर दूध देने का कार्य मादा बकरी करती है, लेकिन यहां एक दो वर्षीय नर बकरा दूध दे रहा है। इस अनोखी घटना की चर्चा पूरे क्षेत्र में फैल गई है और बकरे को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं।

‘बोरा’ बना पूरे इलाके में आकर्षण का केंद्र

सेलाकुई निवासी सुखपाल के पास मौजूद इस दो वर्षीय बकरे का नाम ‘बोरा’ है। परिवार के लोगों ने कुछ समय पहले उसके शरीर में विकसित थनों को देखा तो उन्हें आश्चर्य हुआ। बाद में जब स्थानीय निवासी राजेंद्र बिल्ला और बकरे के मालिक ने उसके थनों से दूध निकलते देखा, तो सभी हैरान रह गए।

यह खबर आसपास के गांवों में तेजी से फैल गई और देखते ही देखते ‘बोरा’ को देखने वालों का तांता लग गया। लोग इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें व वीडियो तेजी से साझा की जा रही हैं।

ग्रामीण बोले— पहली बार देखा ऐसा नजारा

स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने आज तक किसी नर बकरे को दूध देते नहीं देखा। कई ग्रामीण इसे प्रकृति का अनोखा करिश्मा मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे दैवीय चमत्कार बता रहे हैं। यही कारण है कि ‘बोरा’ इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पशु चिकित्सकों ने बताया वैज्ञानिक कारण

हालांकि पशु चिकित्सा विशेषज्ञ इस घटना को चमत्कार नहीं मान रहे हैं। सहसपुर के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.एस. मोल्फा के अनुसार यह एक दुर्लभ हार्मोनल और जैविक स्थिति का परिणाम हो सकता है।

उन्होंने बताया कि हजारों नर पशुओं में से किसी एक में एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोलैक्टिन (Prolactin) हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में नर पशु के शरीर में थनों का विकास होने लगता है और उनमें दूध का स्राव भी शुरू हो सकता है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को गाइनेकोमास्टिया (Gynecomastia) कहा जाता है।

दुर्लभ है, लेकिन विज्ञान में संभव

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले बेहद कम देखने को मिलते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूरी तरह संभव है। हार्मोनल असंतुलन के कारण कुछ नर पशुओं में मादा जैसे जैविक लक्षण विकसित हो सकते हैं। यही वजह है कि यह मामला लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है।

चमत्कार या विज्ञान?

एक ओर जहां ग्रामीण इसे भगवान का चमत्कार और प्रकृति का अनोखा खेल मान रहे हैं, वहीं पशु चिकित्सा विशेषज्ञ इसे दुर्लभ हार्मोनल परिवर्तन का परिणाम बता रहे हैं। फिलहाल दो वर्षीय बकरा ‘बोरा’ देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग इस अनोखी घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए लगातार सेलाकुई पहुंच रहे हैं।

नोट: विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की घटनाएं अत्यंत दुर्लभ होती हैं। किसी भी पशु में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से जांच कराना आवश्यक है।

— दून वैली टाइम्स

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