दूध पीते-पीते मां की गोद से खिसका 9 माह का मासूम, चलती सीमांचल एक्सप्रेस से गिरा

पिता चेन खींचने के लिए गिड़गिड़ाता रहा, यात्रियों ने जंगल का हवाला देकर रोका; 23 घंटे बाद झाड़ियों में मिला शव

फतेहपुर। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर सीमांचल एक्सप्रेस में सफर कर रहे एक परिवार की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब नौ माह का मासूम बच्चा चलती ट्रेन की इमरजेंसी खिड़की से नीचे गिर गया। बच्चे के ट्रेन से गिरने का अंदेशा होने पर पिता ने ट्रेन की चेन खींचकर उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन यात्रियों और ट्रेन एस्कॉर्ट द्वारा कथित तौर पर उन्हें रोक दिया गया। करीब 23 घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद मासूम का शव फैजुल्लापुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक किनारे झाड़ियों से बरामद हुआ।

आनंद विहार से बिहार जा रहा था परिवार
दिल्ली के सीतापुरी में किराए के मकान में रहने वाले मोहन कुमार अपनी पत्नी काजल और नौ माह के बेटे के साथ आनंद विहार से सीमांचल एक्सप्रेस के एस-1 कोच में सवार हुए थे। परिवार को बिहार के बेगूसराय जिले के बखरी थाना क्षेत्र स्थित पैतृक गांव सलौना जाना था। दंपती की बर्थ संख्या 61 और 64 बताई गई है।

दूध पिलाते समय मां की गोद से खिसका बच्चा
बताया गया कि थरियांव थाना क्षेत्र में फैजुल्लापुर स्टेशन के पास जब यह घटना हुई, उस समय मोहन शौचालय गए थे। उनकी पत्नी काजल बच्चे को दूध पिला रही थीं और इसी दौरान उन्हें नींद आ गई। आशंका है कि बच्चा मां की गोद से खिसककर पीछे की ओर गया और कोच की इमरजेंसी खिड़की से नीचे गिर गया।

शौचालय से लौटने के बाद मोहन ने बच्चे को सीट पर नहीं देखा। पत्नी को जगाने के बाद दोनों ने कोच में बच्चे की तलाश शुरू की। जब मासूम नहीं मिला तो उन्हें उसके ट्रेन से गिरने का अंदेशा हुआ।

पिता चेन खींचने के लिए करता रहा गुहार
बच्चे के ट्रेन से गिरने की आशंका के बाद मोहन ने खागा और सिराथू के बीच चेन पुलिंग करने की कोशिश की। परिजनों के अनुसार, यात्रियों और ट्रेन में मौजूद एस्कॉर्ट ने उन्हें यह कहते हुए रोक दिया कि आगे जंगल का इलाका है और वहां ट्रेन रोकने से कोई मदद नहीं मिलेगी। ट्रेन आगे बढ़ती रही और परिवार प्रयागराज पहुंच गया, जहां जीआरपी को घटना की सूचना दी गई।

रातभर चला सर्च ऑपरेशन
सूचना मिलने के बाद फतेहपुर जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने रेलवे ट्रैक के आसपास मासूम की तलाश शुरू की। रातभर रेलवे ट्रैक, झाड़ियों और आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया गया। अगले दिन सिविल पुलिस की टीम भी तलाशी अभियान में शामिल हुई।

करीब दोपहर 3:30 बजे फैजुल्लापुर रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक किनारे झाड़ियों में मासूम का शव बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक, बच्चे के सिर में गंभीर चोट लगने की आशंका है। जलभराव, घनी झाड़ियों और खरपतवार के कारण तलाशी अभियान में भी मुश्किलें आईं।

शव मिलने के बाद भी परेशान रहे माता-पिता
बेटे की मौत की खबर से माता-पिता पूरी तरह टूट गए। परिजनों का आरोप है कि शव मिलने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को लेकर भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। कभी कागजात तो कभी स्टाफ उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। परिवार जल्द से जल्द शव लेकर दिल्ली लौटना चाहता था, लेकिन उन्हें इंतजार करना पड़ा।

तीन साल बाद गांव लौटने की खुशी मातम में बदली
मोहन के मुताबिक, शादी के बाद से वह पत्नी के साथ दिल्ली में रह रहे हैं और एक अधिवक्ता के मुंशी के तौर पर काम करते हैं। बेटे के जन्म के बाद करीब तीन साल बाद परिवार के साथ पैतृक गांव लौटने की खुशी थी। लेकिन रास्ते में हुई इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।

इस घटना ने चलती ट्रेनों में इमरजेंसी खिड़कियों की सुरक्षा, यात्रियों की संवेदनशीलता और आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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