यमकेश्वर विधानसभा: क्या इस बार बदलेगा इतिहास? कांग्रेस, भाजपा और यूकेडी में कौन मारेगा बाजी?

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Doon Valley Times | विशेष रिपोर्ट
पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड की चर्चित यमकेश्वर विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बनती नजर आ रही है। राज्य गठन के बाद से इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का लगातार दबदबा रहा है और अब तक हुए सभी विधानसभा चुनावों में पार्टी ने जीत दर्ज की है। हालांकि, आगामी वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। कांग्रेस, भाजपा और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) तीनों ही दल संभावित उम्मीदवारों और चुनावी रणनीति को लेकर सक्रिय हो चुके हैं।
हालांकि अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर संभावित दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
भाजपा में कई नाम चर्चा में
भाजपा की ओर से वर्तमान विधायक रेनू बिष्ट, पूर्व विधायक विजया बड़थ्वाल, हेमंत द्विवेदी और संजीव चौहान के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।
सबसे अधिक चर्चा वर्तमान विधायक रेनू बिष्ट को लेकर हो रही है। अंकिता भंडारी हत्याकांड के दौरान वीआईपी रिजॉर्ट पर जेसीबी चलाए जाने के मामले को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा पर हमलावर रहा है। क्षेत्र के एक वर्ग में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा रेनू बिष्ट को दोबारा टिकट देती है तो विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी प्रचार में प्रमुखता से उठा सकता है।
हालांकि भाजपा का मजबूत संगठन और लगातार जीत का रिकॉर्ड इस सीट पर उसकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। अंतिम निर्णय पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और प्रदेश संगठन करेगा।

*कांग्रेस में रुचि कैंत्यूरा सबसे मजबूत दावेदार*
कांग्रेस की ओर से पूर्व ब्लॉक प्रमुख रुचि कैंत्यूरा का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आ रहा है। क्षेत्र में उनकी लगातार सक्रियता, ग्रामीण इलाकों में जनसंपर्क और स्थानीय समस्याओं को लेकर मुखर भूमिका ने उन्हें मजबूत राजनीतिक पहचान दिलाई है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, रुचि कैंत्यूरा ने भाजपा सरकार के कार्यकाल में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ब्लॉक प्रमुख का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक क्षमता का परिचय दिया था।
उनके परिवार की भी क्षेत्रीय राजनीति में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी सास सरोजनी कैंत्यूरा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं और पूर्व ब्लॉक प्रमुख, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तथा उत्तराखंड महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, जिसमें उन्हें बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा था।
कांग्रेस के भीतर पूर्व जिला अध्यक्ष विनोद डबराल का नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है।

*यूकेडी भी तलाश रही मजबूत उम्मीदवार*
उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) भी इस सीट पर अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। पार्टी की ओर से सुदेश भट्ट, शांति प्रसाद भट्ट सहित अन्य नेताओं के नाम चर्चा में हैं। वहीं राजनीतिक हलकों में शक्तिशैल कपरूवान को भी संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि यूकेडी का प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक सीमित माना जाता है, लेकिन यदि पार्टी मजबूत और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली उम्मीदवार मैदान में उतारती है तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जिसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।

*स्थानीय मुद्दे बन सकते हैं चुनाव का केंद्र*
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार यमकेश्वर विधानसभा में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, पलायन, पर्यटन विकास, पेयजल और ग्रामीण आधारभूत सुविधाएं जैसे मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके साथ ही प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, संगठन की मजबूती और जनता के बीच सक्रियता भी निर्णायक साबित होगी।

*क्या इस बार बदलेगा इतिहास?*
अब तक यमकेश्वर विधानसभा सीट पर भाजपा का विजय अभियान लगातार जारी रहा है, लेकिन इस बार चुनावी मुकाबला पहले की तुलना में अधिक रोचक होने के संकेत मिल रहे हैं। यदि कांग्रेस मजबूत और स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं भाजपा अपने मजबूत संगठन और लगातार जीत के रिकॉर्ड के भरोसे चुनाव लड़ेगी, जबकि यूकेडी भी कुछ क्षेत्रों में चुनावी समीकरण प्रभावित करने की क्षमता रखती है।
फिलहाल सभी राजनीतिक दलों की निगाहें टिकट वितरण पर टिकी हुई हैं। उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही यमकेश्वर विधानसभा की चुनावी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

(नोट: यह रिपोर्ट क्षेत्र में चल रही राजनीतिक चर्चाओं, संभावित दावेदारों तथा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारियों पर आधारित है। किसी भी राजनीतिक दल ने अभी तक अपने आधिकारिक प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं।)

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