देहरादून | दून वैली टाइम्स

देहरादून की विशेष पॉक्सो अदालत ने 13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के एक बेहद संवेदनशील मामले में आरोपी मनीष उर्फ धानू को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(3), 506 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत दोषी मानते हुए कठोर दंड दिया। आरोपी पीड़िता का चचेरा भाई था और उसने रिश्ते के विश्वास को तोड़ते हुए कई महीनों तक उसका यौन शोषण किया।
धमकी देकर कई महीनों तक करता रहा शोषण
अभियोजन के अनुसार मामला देहरादून के कोतवाली क्षेत्र का है। आरोपी करीब दो से तीन महीने तक नाबालिग को जान से मारने की धमकी देता रहा और उसके आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने का भय दिखाकर लगातार दुष्कर्म करता रहा। डर और मानसिक दबाव के कारण पीड़िता लंबे समय तक किसी को घटना की जानकारी नहीं दे सकी।
पिता के पहुंचने पर खुला मामला
घटना का खुलासा 3 मई 2023 को हुआ, जब आरोपी बहाने से पीड़िता को एक कार्यालय में ले गया। उसी दौरान पीड़िता के पिता वहां पहुंच गए। उन्हें देखते ही आरोपी मौके से फरार हो गया। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिवार को पूरी घटना बताई, जिसके आधार पर 6 मई 2023 को कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया।
स्कूल रिकॉर्ड बना अहम साक्ष्य
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अदालत ने पीड़िता की उम्र का निर्धारण स्कूल के दाखिला रजिस्टर, जन्मतिथि प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेखों के आधार पर किया। रिकॉर्ड में जन्मतिथि 24 अगस्त 2009 दर्ज होने के कारण अदालत ने माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र लगभग 13 वर्ष थी। इसके चलते पॉक्सो एक्ट के सभी प्रावधान पूरी तरह लागू हुए।
संपत्ति विवाद का तर्क अदालत ने किया खारिज
बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि पारिवारिक संपत्ति विवाद के कारण आरोपी को झूठा फंसाया गया है तथा पुलिस जांच में कई खामियां हैं। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को अस्वीकार करते हुए कहा कि यदि उपलब्ध साक्ष्य अपराध को सिद्ध करते हैं तो जांच में कथित कमियों का लाभ आरोपी को नहीं दिया जा सकता। अदालत ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया।
अदालत की सख्त टिप्पणी
विशेष पॉक्सो अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता की गवाही, उसके परिजनों के बयान, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य पूरी तरह विश्वसनीय हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। अदालत ने कहा कि नाबालिगों के खिलाफ इस तरह के अपराध समाज के लिए अत्यंत गंभीर हैं और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिले और समाज में कानून का प्रभाव बना रहे।




