चीनी के दामों में लगी आग, 65 रुपये किलो तक पहुंची कीमत

15 दिनों में करीब 15 रुपये की तेजी, त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी आम लोगों की चिंता; सरकार ने जमाखोरी रोकने के लिए सख्त किए स्टॉक नियम

नई दिल्ली। देश में महंगाई की मार झेल रहे आम उपभोक्ताओं को अब चीनी की बढ़ती कीमतों ने परेशान करना शुरू कर दिया है। कई बाजारों में चीनी का खुदरा भाव 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों में कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। कारोबारियों के मुताबिक करीब 15 दिनों में चीनी के दाम में लगभग 15 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

45-50 रुपये से सीधे 65 रुपये तक पहुंचा भाव

चीनी के दामों में तेजी की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ बाजारों में करीब एक महीने पहले खुदरा कीमत 46 से 48 रुपये प्रति किलो के आसपास थी। इसके बाद कीमत लगातार बढ़ती गई और कई जगहों पर यह 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। पंजाब के कुछ बाजारों में थोक भाव करीब 60 रुपये किलो और खुदरा भाव लगभग 65 रुपये किलो रिपोर्ट किया गया है।

उत्तर प्रदेश के बाजारों में भी खुदरा चीनी की कीमत 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। कारोबारियों के अनुसार पिछले 15 दिनों में ही कीमत में करीब 15 रुपये प्रति किलो की तेजी आई है।

त्योहारों से पहले बढ़ी मांग ने बढ़ाया दबाव

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण त्योहारी सीजन में मांग बढ़ना माना जा रहा है। आने वाले दिनों में गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के कारण मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ने की संभावना है।

बाजार में मांग बढ़ने के साथ कई मिलों द्वारा सीमित मात्रा में स्टॉक जारी किए जाने की खबरों ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है। व्यापारियों के अनुसार त्योहारी मांग आगे भी बनी रह सकती है, जिससे कीमतों में तत्काल राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

सरकार ने जमाखोरी पर कसा शिकंजा

बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक होल्डिंग की सीमा तय की है। सरकार ने चीनी डीलरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक स्टॉक सीमा लागू की है। इसका उद्देश्य बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना, जमाखोरी रोकना और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराना है।

सरकार ने बाद में बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए भी स्टॉक रखने की अवधि को सीमित करने का फैसला किया। सितंबर से ऐसे बड़े उपभोक्ता 15 दिनों से अधिक का स्टॉक रखने में सक्षम नहीं होंगे। यह कदम बाजार में कृत्रिम कमी पैदा होने की आशंका को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

सरकार बोली—देश में चीनी की उपलब्धता पर नजर

केंद्र सरकार का कहना है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी को केवल एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं है। सरकार ने हाल में कहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम का असर और त्योहारी मांग जैसे कई कारण हैं।

सरकार के अनुसार मौजूदा सीजन में चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से कम रहने की संभावना है। ऐसे में नए पेराई सत्र तक बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।

थोक बाजार में भी रिकॉर्ड तेजी

सरकारी मूल्य निगरानी प्रणाली के अनुसार 19 अगस्त 2026 को देश का औसत थोक चीनी भाव करीब 5,003.63 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। हालांकि अलग-अलग राज्यों और बाजारों में गुणवत्ता, आपूर्ति और स्थानीय परिस्थितियों के कारण कीमतों में अंतर है।

वहीं, खुदरा बाजार में कई स्थानों पर 60 से 65 रुपये प्रति किलो तक भाव पहुंचने से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है। चाय, मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य पदार्थों की लागत भी इससे प्रभावित हो सकती है।

आम आदमी की जेब पर सीधा असर

चीनी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं में शामिल है। कीमतों में इतनी तेजी का असर सिर्फ घरों के बजट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चाय-नाश्ते की दुकानों, मिठाई कारोबार, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग पर भी पड़ सकता है।

त्योहारी सीजन में मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है। इसका असर आगे चलकर तैयार उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

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