जिला योजना में कथित बंदरबांट के आरोप, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल का अनिश्चितकालीन धरना जारी

उत्तरकाशी। जिला योजना में कथित अनियमितताओं, योजनाओं के चयन में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और बजट आवंटन में पारदर्शिता की कमी के आरोपों को लेकर यमुनोत्री विधानसभा के निर्दलीय विधायक संजय डोभाल का आंदोलन जारी है। विधायक ने जिला योजना में संशोधन और योजनाओं के चयन की प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक भी धरने में शामिल हैं।

विधायक संजय डोभाल का कहना है कि जिला योजना का उद्देश्य जिले के सभी क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों के आधार पर विकास कार्यों को प्राथमिकता देना है, लेकिन वर्तमान प्रक्रिया में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को अपेक्षित महत्व नहीं दिए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि जब जनता अपने क्षेत्र की समस्याओं और जरूरतों के आधार पर जनप्रतिनिधियों को चुनती है तो जिला योजना में उनके प्रस्तावों पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।

जिला योजना की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

धरने के दौरान विधायक ने जिला योजना में शामिल प्रस्तावों और बजट आवंटन को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विशेष योजनाओं और क्षेत्रों को बड़ी धनराशि आवंटित की गई, जबकि कई जरूरी विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं कराया गया।

विधायक ने जिला योजना की सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि योजनाओं के चयन को लेकर पारदर्शिता का अभाव है और संबंधित प्रक्रिया की जानकारी स्पष्ट रूप से सामने नहीं रखी गई है। उन्होंने मांग की कि जिला योजना में शामिल सभी प्रस्तावों, उनकी स्वीकृति, बजट और चयन के आधार को सार्वजनिक किया जाए, ताकि जनता को पूरी जानकारी मिल सके।

‘जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों की अनदेखी क्यों?’

संजय डोभाल ने कहा कि जिला योजना में विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्ष और अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की ओर से क्षेत्रीय आवश्यकताओं के आधार पर दिए गए प्रस्तावों को उचित स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जनप्रतिनिधियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है तो योजनाओं के चयन का आधार क्या है और किस स्तर पर प्रस्तावों को स्वीकृति दी जा रही है?

उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई कार्य आज भी बजट के अभाव में लंबित हैं। ऐसे में जिला योजना की धनराशि का आवंटन वास्तविक जरूरत और जनहित के आधार पर होना चाहिए।

प्रभारी मंत्री की भूमिका पर भी सवाल

विधायक ने जिला योजना में प्रभारी मंत्री की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि योजनाओं के चयन में स्थानीय परिस्थितियों और क्षेत्र की जमीनी जरूरतों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों की समस्याओं से सीधे जुड़े होते हैं, इसलिए उनके सुझावों और प्रस्तावों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

संजय डोभाल ने जिला योजना की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि यदि सभी प्रस्ताव नियमों के तहत और निष्पक्ष तरीके से स्वीकृत किए गए हैं तो उनकी जानकारी सार्वजनिक करने में किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

स्वास्थ्य केंद्र में अल्ट्रासाउंड मशीन को लेकर भी सवाल

विधायक ने योजनाओं के चयन में कथित विसंगतियों का उदाहरण देते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े एक प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे स्थान पर अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराने की बात सामने आई है, जहां आवश्यक चिकित्सा ढांचा और अन्य बुनियादी सुविधाएं पर्याप्त रूप से मौजूद नहीं हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि किसी स्वास्थ्य केंद्र में यदि भवन, चिकित्सकीय स्टाफ और जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं तो वहां महंगी चिकित्सा मशीन उपलब्ध कराने का क्या औचित्य है। उनका कहना है कि सरकारी धन का उपयोग योजनाबद्ध और जनहित में होना चाहिए।

‘मांग पूरी होने तक जारी रहेगा धरना’

संजय डोभाल ने स्पष्ट किया है कि जिला योजना में संशोधन और पारदर्शिता की मांग पूरी होने तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि जनता के अधिकार, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान और विकास कार्यों में पारदर्शिता के लिए है।

विधायक ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर सरकार और प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर जिला कलेक्ट्रेट का घेराव करने की बात भी उन्होंने कही है।

प्रशासन और सरकार के पक्ष का इंतजार

जिला योजना में कथित अनियमितताओं, बजट आवंटन, योजनाओं के चयन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी को लेकर विधायक संजय डोभाल की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और प्रभारी मंत्री की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

फिलहाल विधायक के धरने के चलते जिला योजना में पारदर्शिता, प्रस्तावों के चयन और बजट आवंटन का मुद्दा उत्तरकाशी में चर्चा का विषय बना हुआ है। विधायक ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है और अब प्रशासन की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर बनी हुई है।

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