पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां मोबाइल फोन चलाने से रोके जाने पर एक 17 वर्षीय किशोरी ने गुस्से में फ्लोर क्लीनर (लाइजोल) पी लिया। घटना के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों के अनुसार किशोरी की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना सोमवार की है। पिथौरागढ़ निवासी 17 वर्षीय किशोरी देर रात तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थी। इस दौरान उसकी मां ने उसे फोन बंद कर पढ़ाई करने की सलाह दी और अधिक समय तक मोबाइल चलाने पर नाराजगी जताई। मां की बात से आहत और गुस्साई किशोरी ने घर के बाथरूम में रखा फर्श साफ करने वाला फ्लोर क्लीनर (लाइजोल) पी लिया।
कुछ ही देर में किशोरी की तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत देखकर परिजनों के होश उड़ गए और उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने समय रहते उपचार शुरू किया, जिससे उसकी स्थिति में सुधार हुआ। बताया जा रहा है कि किशोरी कक्षा 11 की छात्रा है और अब उसकी हालत स्थिर है।
मोबाइल की लत बन रही गंभीर चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि किशोरों में बढ़ती डिजिटल लत और घटती सहनशीलता का संकेत है। लगातार मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग का असर बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, भावनाओं पर नियंत्रण खो देना और आवेश में गलत कदम उठाना आज गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अभिभावकों को बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए। मोबाइल के उपयोग के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने के साथ-साथ बच्चों की भावनाओं को समझना भी जरूरी है। वहीं, बच्चों को भी किसी समस्या या तनाव की स्थिति में परिवार के सदस्यों से खुलकर बात करनी चाहिए।
यह घटना अभिभावकों और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है कि डिजिटल उपकरणों का संतुलित उपयोग और परिवार में बेहतर संवाद आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।
