
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के ठेकेदारों के लिए पंजीकरण व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। अब ठेकेदारों को अलग-अलग सरकारी विभागों में काम करने के लिए अलग-अलग पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी। एक ही पंजीकरण के आधार पर वे सभी विभागों में निविदाओं (टेंडर) में भाग ले सकेंगे।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद वित्त सचिव दिलीप जावलकर ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में ठेकेदारों के लिए एक समान पंजीकरण प्रणाली लागू की जाएगी। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी, जिससे पंजीकरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और अनावश्यक भागदौड़ खत्म होगी।
नई व्यवस्था के अनुसार यदि कोई ठेकेदार उच्च श्रेणी के लिए निर्धारित मानकों को पूरा करता है, तो ऑनलाइन सिस्टम स्वतः उसकी श्रेणी को अपग्रेड कर देगा। इससे ठेकेदारों को बार-बार आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
सरकार ने ‘डी’ श्रेणी के ठेकेदारों को भी बड़ी राहत दी है। अब वे डेढ़ करोड़ रुपये तक के टेंडर में भाग ले सकेंगे। पहले उनके लिए यह सीमा एक करोड़ रुपये तक निर्धारित थी। सरकार का मानना है कि इस फैसले से निर्माण कार्यों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, प्रक्रिया सरल होगी और ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे।
नई ऑनलाइन और एकीकृत पंजीकरण व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रशासनिक प्रक्रियाएं आसान होंगी और सरकारी विभागों में कार्य आवंटन अधिक प्रभावी व पारदर्शी तरीके से हो सकेगा।




