मोहम्मद दीपक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत

FIR पर रोक, उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश पर भी लगी रोक; सोशल मीडिया पर बोलने की पाबंदी फिलहाल स्थगित

कोयंबर्ग के चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट का अहम हस्तक्षेप, चार सप्ताह में जवाब तलब

देहरादून। कोयंबर्ग के चर्चित मोहम्मद दीपक प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने मोहम्मद दीपक के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर फिलहाल रोक लगा दी है। इसके साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी गई है, जिसके तहत दीपक को मामले से संबंधित विषय पर सोशल मीडिया पर कुछ भी बोलने या पोस्ट करने से प्रतिबंधित किया गया था।

मोहम्मद दीपक ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए एफआईआर की कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया। साथ ही हाईकोर्ट के उस आदेश के प्रभाव पर भी फिलहाल रोक लगा दी गई, जिसमें सोशल मीडिया पर बयान देने को लेकर पाबंदी लगाई गई थी। अदालत ने संबंधित पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

26 जनवरी को विवाद ने पकड़ा था तूल

मामला इसी वर्ष 26 जनवरी को उस समय चर्चा में आया था, जब कोयंबर्ग में एक मुस्लिम दुकानदार द्वारा ‘बाबा’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर हिंदूवादी संगठनों के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी। विरोध के दौरान विवाद बढ़ गया और मौके पर हंगामे की स्थिति पैदा हो गई।

इसी दौरान जिम संचालक दीपक ने कथित तौर पर लोगों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान उनका नाम पूछा गया। दीपक ने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया। घटना के बाद कुछ हिंदूवादी संगठनों की ओर से दीपक के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया और मामला पुलिस तक पहुंचा।

हाईकोर्ट से नहीं मिली थी तत्काल राहत

मामला बढ़ने के बाद दीपक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद प्रकरण उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दीपक को तत्काल राहत नहीं मिली। अदालत ने उन्हें मामले से संबंधित विषय पर सोशल मीडिया के माध्यम से कोई टिप्पणी अथवा पोस्ट करने से भी रोक दिया था।

हाईकोर्ट के इसी आदेश को मोहम्मद दीपक ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है।

अगली सुनवाई पर टिकी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल एफआईआर और हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई है। साथ ही संबंधित पक्षों से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। ऐसे में अब अगली सुनवाई महत्वपूर्ण होगी और उसी के बाद मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कोयंबर्ग का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

About The Author