सीएम धामी का कांग्रेस पर तीखा हमला, मुस्लिम यूनिवर्सिटी से लेकर ‘शुद्धीकरण’ विवाद तक राहुल गांधी से मांगा जवाब
बोले धामी—“कांग्रेस की रैली से अल्लाहू अकबर के नारे क्यों लगते हैं?”; यूसीसी, मदरसा बोर्ड, अतिक्रमण और विकास के मुद्दे पर भी साधा निशाना
देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही सियासी तापमान बढ़ने लगा है। विकास और रोजगार से लेकर धर्म, तुष्टीकरण, यूसीसी, मदरसा बोर्ड, अतिक्रमण और कथित मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोलते हुए कई गंभीर सवाल उठाए और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सीधे जवाब मांगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राज्य में सरकार के विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों से कांग्रेस परेशान है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार मिल रहा है तो कांग्रेस को परेशानी है, समान नागरिक संहिता लागू हुई तो कांग्रेस को परेशानी है, मदरसा बोर्ड को लेकर सरकार ने कदम उठाया तो भी कांग्रेस विरोध कर रही है और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई होने पर भी कांग्रेस सवाल खड़े कर रही है।
“उत्तराखंड का विकास कांग्रेस को हजम नहीं हो रहा”
सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में उत्तराखंड के विकास के लिए ऐसा कोई उल्लेखनीय काम नहीं किया, जिसे जनता आज याद करे। उनके मुताबिक अब भाजपा सरकार के विकास कार्यों में कमियां खोजने की कोशिश की जा रही है।
धामी ने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं को रोजगार देने, राज्य में विकास कार्यों को गति देने और नीतिगत सुधारों की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि सरकार का हर अच्छा काम विपक्ष को खटक रहा है।
हालांकि, मुख्यमंत्री का हमला केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति को कथित तुष्टीकरण से जोड़ते हुए धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी तीखे सवाल उठाए।
“2022 में मुस्लिम यूनिवर्सिटी क्यों बनवाना चाहती थी कांग्रेस?”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी से सबसे बड़ा सवाल कथित ‘मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ के मुद्दे पर किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस पर उत्तराखंड में मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनवाने की बात करने के आरोप लगाए गए थे।
धामी ने राहुल गांधी से सवाल किया कि देवभूमि उत्तराखंड में कांग्रेस मुस्लिम यूनिवर्सिटी क्यों बनवाना चाहती थी? उन्होंने कांग्रेस से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या पार्टी ने वास्तव में ऐसा कोई वादा किया था या नहीं।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे को तुष्टीकरण की राजनीति से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि चुनाव के समय जनता के सामने इस सवाल का जवाब रखा जाना चाहिए।
रामलीला मंच और ‘शुद्धीकरण’ विवाद पर भी सियासी वार
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धीकरण’ को लेकर चल रहे विवाद ने भी राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि शुद्धीकरण से भाजपा का कोई लेना-देना नहीं है और कांग्रेस इस मामले को राजनीतिक रूप दे रही है।
धामी ने सवाल उठाया कि रामलीला के मंच से कथित तौर पर “अल्लाहू अकबर” के नारे क्यों लगाए गए? उन्होंने कहा कि किसी को भी अपनी पसंद का नारा लगाने से किसी ने नहीं रोका है, लेकिन रामलीला के मंच को राजनीति और धार्मिक विवाद का मंच क्यों बनाया जा रहा है?
मुख्यमंत्री ने इस मामले में लगाए जा रहे आरोपों के प्रमाण पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को इस विवाद से जोड़कर आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें अनुसूचित जाति समाज के लोग बताए जा रहे हैं। धामी ने सवाल किया कि कोई व्यक्ति अपने ही समाज का अपमान कैसे कर सकता है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से इस मामले में ठोस प्रमाण और सबूत सामने रखने को कहा।
“कांग्रेस दलितों की हमदर्द बनने का ढोंग कर रही”
धामी ने कांग्रेस के दलित राजनीति से जुड़े दावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस दलितों की हमदर्द बनने का ढोंग कर रही है और इतिहास में पार्टी ने अपने ही वरिष्ठ नेताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया।
इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी का उदाहरण दिया। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि सीताराम केसरी की ऐसी क्या गलती थी कि उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया गया?
धामी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने के लिए उस समय सीताराम केसरी को अपमानित किया गया। उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व से इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देने को कहा।
गदरपुर और रुद्रपुर मामलों पर भी राहुल गांधी से सवाल
मुख्यमंत्री ने गदरपुर से जुड़े मौलाना विवाद और रुद्रपुर में सामने आई कथित घटना का भी उल्लेख किया। धामी ने सवाल किया कि जब किसी मौलाना की ओर से कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आता है, तब राहुल गांधी चुप क्यों रहते हैं?
उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब हिंदू समाज को बांटने के प्रयास का आरोप सामने आता है तो कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया अलग दिखाई देती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गांधी को इन मामलों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
धर्म और विकास—2027 में किस मुद्दे पर होगी जंग?
मुख्यमंत्री के बयान के बाद उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर यह बहस तेज होने के संकेत हैं कि वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव किन मुद्दों पर लड़ा जाएगा। भाजपा जहां विकास, रोजगार, यूसीसी, अतिक्रमण हटाने और सरकार की उपलब्धियों को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में दिखाई दे रही है, वहीं कांग्रेस सरकार की नीतियों और कथित सामाजिक एवं राजनीतिक विभाजन को लेकर सवाल उठाती रही है।
मुस्लिम यूनिवर्सिटी का मुद्दा, धार्मिक नारों का विवाद और हल्द्वानी का कथित ‘शुद्धीकरण’ प्रकरण अब राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में आते जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में इन मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव और तेज होने की संभावना है।
अब कांग्रेस के जवाब का इंतजार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने हमले में कांग्रेस और राहुल गांधी के सामने कई सवाल रखे हैं। खासकर मुस्लिम यूनिवर्सिटी, धार्मिक नारों, गदरपुर-रुद्रपुर के मामलों और सीताराम केसरी से जुड़े आरोपों पर मुख्यमंत्री ने जवाब मांगा है।
अब निगाहें कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर हैं। क्या कांग्रेस इन आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देगी या फिर इसे भाजपा की चुनावी रणनीति करार देगी—यह आने वाले दिनों में साफ होगा।
2027 की चुनावी जंग अभी दूर है, लेकिन सियासी मुद्दों ने दस्तक दे दी है। उत्तराखंड की सियासत में विकास से लेकर धर्म, तुष्टीकरण और मुस्लिम यूनिवर्सिटी जैसे मुद्दे एक बार फिर खुलकर सामने आ गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये मुद्दे 2027 की चुनावी जंग में वोटों में तब्दील होंगे, या फिर महज सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाएंगे?
