E20 पेट्रोल पर बड़ा सवाल: क्या घट रहा है माइलेज? वाहन चालकों के दावों ने बढ़ाई चिंता, सरकार से पारदर्शी अध्ययन की मांग

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Doon Valley Times | राष्ट्रीय समाचार

देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को तेजी से लागू किया जा रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि इस पहल से कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी, किसानों की आय बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। वहीं दूसरी ओर, कई वाहन चालकों का दावा है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनके वाहनों का माइलेज पहले की तुलना में कम हो गया है। कुछ उपभोक्ताओं ने करीब 30 प्रतिशत तक माइलेज घटने का अनुभव साझा किया है।

इन्हीं नागरिक अनुभवों के आधार पर उपलब्ध सरकारी पेट्रोल खपत के आंकड़ों और मौजूदा पेट्रोल कीमतों को ध्यान में रखते हुए किए गए एक गणितीय विश्लेषण में संभावित आर्थिक प्रभाव का आकलन किया गया है। हालांकि यह विश्लेषण किसी सरकारी या वैज्ञानिक अध्ययन का निष्कर्ष नहीं है।

देश में प्रतिदिन कितनी होती है पेट्रोल की खपत?

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन Petroleum Planning & Analysis Cell (PPAC) के अनुसार भारत में प्रतिदिन औसतन करीब 12 करोड़ लीटर पेट्रोल की खपत होती है।

यदि माइलेज 30% घटे तो क्या होगा?

विश्लेषण के अनुसार यदि कोई वाहन पहले 16 किलोमीटर प्रति लीटर का माइलेज देता था और अब 11.2 किलोमीटर प्रति लीटर दे रहा है, तो समान दूरी तय करने के लिए लगभग 42.9 प्रतिशत अधिक ईंधन की आवश्यकता होगी।

इसी अनुपात को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने पर—

  • प्रतिदिन सामान्य खपत: 12 करोड़ लीटर
  • संभावित अतिरिक्त खपत: करीब 5.14 करोड़ लीटर प्रतिदिन
  • कुल संभावित आवश्यकता: 17.14 करोड़ लीटर प्रतिदिन

देश का औसत पेट्रोल मूल्य कैसे माना गया?

विश्लेषण में दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता सहित विभिन्न राज्यों की खुदरा पेट्रोल कीमतों को आधार बनाते हुए 101 रुपये प्रति लीटर का कार्यशील (Working) औसत लिया गया है। यह कोई सरकारी घोषित राष्ट्रीय औसत नहीं है।

जेब पर कितना पड़ सकता है असर?

यदि अतिरिक्त खपत 5.14 करोड़ लीटर प्रतिदिन हो और औसत कीमत 101 रुपये प्रति लीटर मानी जाए, तो संभावित अतिरिक्त खर्च—

  • प्रतिदिन: लगभग 519 करोड़ रुपये
  • प्रति माह (30 दिन): लगभग 15,570 करोड़ रुपये
  • प्रति वर्ष: लगभग 1.89 लाख करोड़ रुपये

यह आकलन केवल उस स्थिति पर आधारित है, जब नागरिकों द्वारा बताई गई लगभग 30 प्रतिशत माइलेज गिरावट व्यापक स्तर पर सही साबित हो।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि E20 कार्यक्रम से—

  • कच्चे तेल के आयात में कमी आएगी।
  • किसानों को एथेनॉल उत्पादन से अतिरिक्त आय मिलेगी।
  • विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल

यदि बड़ी संख्या में वाहन चालकों का अनुभव सही है, तो कई महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं—

  • क्या E20 पेट्रोल पर देशव्यापी स्वतंत्र माइलेज अध्ययन कराया जाना चाहिए?
  • क्या विभिन्न कंपनियों के वाहनों पर वास्तविक सड़क परीक्षण सार्वजनिक किए जाने चाहिए?
  • क्या उपभोक्ताओं को E20 के प्रभावों के बारे में अधिक पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए?
  • यदि ईंधन की कुल खपत बढ़ती है, तो क्या कच्चे तेल की बचत और पर्यावरणीय लाभ के दावे प्रभावित होंगे?

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

यह रिपोर्ट उपलब्ध सरकारी पेट्रोल खपत के आंकड़ों, प्रमुख शहरों की खुदरा कीमतों, नागरिकों के अनुभवों और गणितीय विश्लेषण पर आधारित है। इसे किसी सरकारी, वैज्ञानिक या स्वतंत्र शोध संस्थान द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। E20 के वास्तविक प्रभावों की पुष्टि के लिए व्यापक तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होंगे।

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