दोहरी मतदाता सूची मामला: हाईकोर्ट सख्त, पंचायत चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों का मांगा पूरा ब्योरा

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सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट में सुनवाई तेज, राज्य निर्वाचन आयोग से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

देहरादून/नैनीताल | Doon Valley Times

उत्तराखंड में नगर निकाय और ग्राम पंचायत की दोहरी मतदाता सूची के बावजूद पंचायत चुनाव लड़कर जीत हासिल करने वाले प्रत्याशियों के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग से ऐसे सभी विजयी प्रत्याशियों का विस्तृत ब्योरा तलब किया है, जिनके नाम नगर निकाय और ग्राम पंचायत दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज थे और इसके बावजूद उन्होंने पंचायत चुनाव लड़ा तथा जीत हासिल की।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

राज्य निर्वाचन आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश बरकरार रहा। हाईकोर्ट ने पहले भी माना था कि आयोग का स्पष्टीकरण उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद हाईकोर्ट में मूल जनहित याचिका पर सुनवाई तेज हो गई है।

आयोग से मांगा गया पूरा ब्योरा

हाईकोर्ट ने निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया है कि वह ऐसे सभी विजयी प्रत्याशियों की जानकारी उपलब्ध कराए, जिनके नाम एक साथ नगर निकाय और ग्राम पंचायत की मतदाता सूचियों में दर्ज थे। अदालत यह भी जानना चाहती है कि ऐसे कितने जनप्रतिनिधि वर्तमान में अपने पदों पर कार्यरत हैं। इस रिपोर्ट के आधार पर अदालत आगे की कार्रवाई तय करेगी।

चुनाव से पहले शुरू हुआ था विवाद

यह मामला पंचायत चुनाव से पहले तब सामने आया था, जब राज्य निर्वाचन आयोग ने एक स्पष्टीकरण जारी कर दोहरी मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद कुछ लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने की अनुमति दी थी। सामाजिक कार्यकर्ता शक्ति सिंह बर्थवाल ने इसे उत्तराखंड पंचायती राज अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के विरुद्ध बताते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आयोग के इस स्पष्टीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

विजयी प्रतिनिधियों पर पड़ सकता है असर

अब पंचायत चुनाव संपन्न हो चुके हैं और संबंधित प्रत्याशी निर्वाचित होकर अपने पदों पर कार्य कर रहे हैं। ऐसे में अदालत के अंतिम निर्णय का असर उन सभी जनप्रतिनिधियों पर पड़ सकता है, जिनके नाम दोहरी मतदाता सूची में दर्ज होने का मामला सामने आया है। अदालत ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि क्या ऐसे सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को इस मामले में पक्षकार बनाया जाना आवश्यक होगा, ताकि उन्हें भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिल सके।

तीन सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने माना कि संभावित रूप से प्रभावित निर्वाचित प्रतिनिधियों को सुनवाई का अवसर देना न्यायहित में आवश्यक हो सकता है। इसी कारण मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जिससे उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की पात्रता और दोहरी मतदाता सूची से जुड़े नियमों पर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

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