कालसी। भूमि संरक्षण वन प्रभाग, कालसी कार्यालय में वर्षों से कार्यरत दैनिक वन कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे वन श्रमिकों को रविवार को चकराता विधायक एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह का समर्थन मिला। भारी बारिश के बीच वह धरना स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने आंदोलनरत कर्मचारियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को विस्तार से सुना और उनके संघर्ष के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
धरनास्थल पर कर्मचारियों ने विधायक को बताया कि लंबे समय से भूख हड़ताल पर बैठे उनके साथी सुनील कुमार (ग्राम दिलौऊ) की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। वहीं दौलत तोमर (ग्राम सरसोना) अब भी भूख हड़ताल पर डटे हुए हैं। कर्मचारियों ने कहा कि लगातार बारिश और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनका आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी है।
इसके बाद विधायक प्रीतम सिंह ने प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) से वार्ता की और उत्तराखंड शासन के प्रमुख सचिव दिलीप जावलकर से दूरभाष पर बातचीत कर कर्मचारियों की मांगों के शीघ्र एवं सकारात्मक समाधान का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे दैनिक वन कर्मचारियों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान होना चाहिए ताकि आंदोलन सम्मानजनक तरीके से समाप्त हो सके।
क्या हैं वन श्रमिकों की प्रमुख मांगें?
धरने पर बैठे दैनिक वन श्रमिकों का कहना है कि उनका बकाया वेतन लंबे समय से लंबित है और उन्हें नियमित मानदेय भी समय पर नहीं मिल रहा। कर्मचारियों ने उच्चतम न्यायालय के 11 नवंबर 2025 के आदेश के अनुरूप न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक मानदेय लागू करने की मांग की है।
इसके अलावा कर्मचारियों ने कार्य से हटाए गए दैनिक श्रमिकों की बहाली, 25 फरवरी 2025 को गठित समिति की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा अन्य लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि जब तक सरकार और विभाग की ओर से लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पांचवें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल
भूख हड़ताल के पांचवें दिन संगठन के अध्यक्ष बबलू के नेतृत्व में बड़ी संख्या में दैनिक वन कर्मचारी धरने पर मौजूद रहे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें न तो समय पर वेतन मिल रहा है और न ही उनकी अन्य मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
धरना स्थल पर मौजूद कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि विधायक के हस्तक्षेप के बाद शासन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर आंदोलन का सम्मानजनक समाधान निकालेगा।






