📰 दून वैली टाइम्स | अल्मोड़ा
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। आए दिन हो रहे हमलों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है। इसी बीच अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे विकासखंड से साहस और हिम्मत की मिसाल पेश करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां 22 वर्षीय युवती ने अचानक हुए गुलदार के हमले के दौरान घबराने के बजाय अपने हाथ में मौजूद दराती (हंसिया) से मुकाबला कर अपनी जान बचा ली। हालांकि इस संघर्ष में युवती गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार, स्याल्दे क्षेत्र के बबलिया गांव के मयाल तोक निवासी 22 वर्षीय सुनीता कत्यूरा, पुत्री हर सिंह कत्यूरा, गुरुवार शाम अपने मवेशियों के लिए घास काटने जंगल की ओर गई थीं। इसी दौरान झाड़ियों में पहले से घात लगाए बैठे एक गुलदार ने अचानक उन पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुलदार ने सुनीता को दबोचने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने असाधारण साहस का परिचय देते हुए हाथ में मौजूद दराती से लगातार वार किए। युवती के साहसिक प्रतिरोध से गुलदार कुछ देर के लिए पीछे हटा। इसी बीच सुनीता की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंच गए। लोगों के शोर मचाने पर गुलदार घायल युवती को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
गुलदार के हमले में सुनीता के शरीर पर कई गहरे घाव आए हैं। गंभीर हालत में उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) देघाट ले जाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार युवती की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम गांव पहुंची और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि गुलदार की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए घटनास्थल के आसपास ट्रैप कैमरे लगाने और पिंजरा स्थापित करने की तैयारी की जा रही है। साथ ही वन कर्मियों की गश्त भी बढ़ा दी गई है, ताकि ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ग्रामीणों में दहशत, कार्रवाई की मांग
घटना के बाद बबलिया गांव और आसपास के क्षेत्रों में भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से क्षेत्र में गुलदार की आवाजाही लगातार बढ़ी है, जिससे खेतों और जंगलों में जाना जोखिम भरा हो गया है। लोगों ने वन विभाग से जल्द से जल्द गुलदार को पकड़ने और प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा के स्थायी इंतजाम करने की मांग की है।
सुनीता कत्यूरा के साहस की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्होंने हिम्मत नहीं दिखाई होती, तो यह घटना और भी दर्दनाक हो सकती थी।
