चकराता क्षेत्र के लोहारी-लोखंडी स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मोइला टॉप जाने वाले मार्ग पर वन विभाग द्वारा लगाए गए गेट और 15 जुलाई से 15 सितंबर तक आवाजाही प्रतिबंधित किए जाने के फैसले को लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। रविवार को बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, होमस्टे संचालक, होटल व्यवसायी, ढाबा संचालक, टैक्सी एवं वाहन चालक मौके पर एकत्र हुए और वन विभाग के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए गंभीर आरोप लगाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोइला टॉप क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पर्यटन पर निर्भर है। हर वर्ष देश के विभिन्न राज्यों से हजारों पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य, ट्रैकिंग और कैंपिंग का आनंद लेने पहुंचते हैं। लेकिन इस बार वन विभाग द्वारा दो महीने के लिए मार्ग बंद किए जाने से स्थानीय लोगों का रोजगार प्रभावित हो गया है। उनका कहना है कि होटल, होमस्टे, रेस्टोरेंट, ढाबों और स्थानीय टैक्सी संचालकों की आय लगभग ठप हो गई है।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बैरियर पर पर्यटकों से ₹50 प्रवेश शुल्क, ₹100 पार्किंग शुल्क तथा गेस्ट हाउस परिसर में बने शौचालय के उपयोग के लिए ₹20 प्रति व्यक्ति अलग से वसूले जा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी राशि लेने के बावजूद पर्यटकों को पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शुल्क लेने के बाद भी विधिवत रसीद नहीं दी जाती, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग स्वयं शौचालयों का बेहतर संचालन नहीं कर पा रहा है तो स्थानीय लोगों को अपने खर्च पर आधुनिक शौचालय बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका दावा है कि वर्तमान में बने शौचालयों की स्थिति संतोषजनक नहीं है और साफ-सफाई एवं पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि मोइला टॉप जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल पर बारिश और खराब मौसम के दौरान पर्यटकों के लिए टीन शेड, विश्राम स्थल, पेयजल, प्राथमिक उपचार तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि बिना सुविधाएं उपलब्ध कराए शुल्क वसूलना पर्यटकों के साथ न्यायसंगत नहीं है। इससे पर्यटक भी नाराज होकर स्थानीय लोगों से शिकायत करते हैं और क्षेत्र की पर्यटन छवि प्रभावित होती है।
होमस्टे संचालक रोहन राणा ने कहा कि सरकार एक ओर युवाओं को स्वरोजगार अपनाने, गांव लौटकर होमस्टे और पर्यटन व्यवसाय विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, वहीं दूसरी ओर पर्यटन सीजन के दौरान मार्ग बंद कर दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि दो महीने तक व्यवसाय बंद रहने से होने वाले आर्थिक नुकसान, बैंक ऋण की किश्तों, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों की भरपाई कौन करेगा।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार वन विभाग के कर्मचारी बैरियर पर ताला लगाकर चले जाते हैं, जिससे ग्रामीणों और पर्यटकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। उनका कहना है कि यदि किसी मरीज या आपातकालीन वाहन को गुजरना पड़े तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, मार्ग बंद करने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए तथा स्थानीय लोगों, पर्यटन व्यवसायियों और वन विभाग के बीच संवाद स्थापित कर ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे वन संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी प्रभावित न हो।
महत्वपूर्ण: प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों पर अनियमितताओं एवं अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में वन विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। वन विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
— संवाददाता, Doon Valley Times







