दून वैली टाइम्स | चंडीगढ़
चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे के बाद पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई। यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में शोधरत पीएचडी छात्रा ज्योति, जो हरियाणा के रेवाड़ी जिले की निवासी थीं, की संदिग्ध परिस्थितियों में करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे कैंपस में शोक और आक्रोश का माहौल है। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और वाइस चांसलर (वीसी) के इस्तीफे की मांग उठाई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसा गर्ल्स हॉस्टल नंबर-10 के पास, हॉस्टल नंबर-8 और यूआईईटी को जोड़ने वाले मार्ग के किनारे बने कच्चे रास्ते पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ज्योति का पैर अचानक फिसल गया, जिसके बाद वह करंट की चपेट में आ गईं। घटनास्थल के पास लगे बिजली के खंभे से करंट आने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों और छात्रों ने तत्काल उन्हें चंडीगढ़ के सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (GMCH-16) पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
हालांकि, छात्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई और करंट लगने की वास्तविक वजह क्या थी, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।
छात्रों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
घटना के बाद पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में बड़ी संख्या में छात्र एकत्र हो गए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि कैंपस में बिजली सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से खराब है, लेकिन कई शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया।
पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल के अध्यक्ष गौरव वीर सोहल सहित कई छात्र नेताओं ने कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा संबंधी खामियों को दूर किया जाता तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी तय करते हुए वाइस चांसलर से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की।
विरोध प्रदर्शन के दौरान तनाव
वीसी कार्यालय के बाहर छात्रों ने देर तक नारेबाजी की। इस दौरान विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच बहस और हल्की धक्का-मुक्की की स्थिति भी देखने को मिली। हालांकि, अधिकांश छात्र कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग पर एकजुट नजर आए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। दूसरी ओर छात्र संगठन लगातार मांग कर रहे हैं कि पूरे कैंपस की बिजली व्यवस्था का तकनीकी ऑडिट कराया जाए, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
फिलहाल पुलिस, विद्युत विभाग और संबंधित जांच एजेंसियां हादसे के सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही करंट लगने के वास्तविक कारणों और जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

