लाल चावल के कटोरे रामा सिराई में रोपाई चरम पर, लोकगीतों की गूंज के बीच संवर रहे खेत

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औषधीय गुणों से भरपूर लाल धान की खेती बनी रवांई घाटी की पहचान
दीवान सिंह तोमर,
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद की रवांई घाटी स्थित रामा सिराई और कमल सिराई पट्टी इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक कृषि संस्कृति के अद्भुत संगम का जीवंत उदाहरण बनी हुई है। औषधीय गुणों से भरपूर प्रसिद्ध लाल धान (चरधान) की रोपाई अपने चरम पर पहुंच गई है। खेतों में चारों ओर हरियाली, पानी से लबालब धान के खेत और लोकगीतों की मधुर गूंज पूरे क्षेत्र को जीवंत बना रही है।
रामा सिराई और कमल सिराई को लंबे समय से उत्तराखंड के “लाल चावल का कटोरा” कहा जाता है। यहां की जलवायु, उपजाऊ भूमि और पारंपरिक खेती की पद्धति लाल धान के उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। यही कारण है कि यहां पैदा होने वाला लाल चावल अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और पौष्टिकता के कारण राज्य ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी पहचान बना चुका है।
इन दिनों सुबह से शाम तक किसान परिवार खेतों में जुटे हुए हैं। पारंपरिक वेशभूषा में ग्रामीण महिलाएं कतारबद्ध होकर लोकगीत गाते हुए धान की रोपाई करती हैं। सामूहिक श्रम और लोकसंस्कृति का यह अनूठा संगम रवांई क्षेत्र की सदियों पुरानी परंपरा को आज भी जीवंत बनाए हुए है। रोपाई के दौरान गाए जाने वाले पारंपरिक गीत खेतों में उत्साह और उमंग का वातावरण तैयार करते हैं।
समय के साथ खेती में आधुनिकता भी देखने को मिल रही है। जहां एक ओर महिलाएं और किसान पारंपरिक तरीके से रोपाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रैक्टर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों के माध्यम से खेतों की जुताई और तैयारी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इससे किसानों का समय और श्रम दोनों की बचत हो रही है।
लाल धान अपनी पौष्टिकता और औषधीय गुणों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इसमें सामान्य चावल की तुलना में अधिक मात्रा में पोषक तत्व, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर पाए जाते हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि इसका नियमित सेवन मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा अन्य जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में लाभकारी माना जाता है। इसी वजह से बाजार में इस चावल की मांग लगातार बढ़ रही है और किसानों को भी इसका बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।
बरसात के मौसम में पानी से भरे खेत, चारों ओर फैली हरियाली और दूर-दूर तक दिखाई देती पर्वतीय श्रृंखलाएं इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक आकर्षक बना देती हैं। इन दिनों रामा सिराई और कमल सिराई के खेत किसी प्राकृतिक चित्र से कम नहीं दिखाई देते। यह दृश्य स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है।
किसानों का कहना है कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो इस वर्ष लाल धान की अच्छी पैदावार होने की पूरी उम्मीद है। समय पर हुई रोपाई से किसानों में उत्साह है और वे बंपर उत्पादन की आशा कर रहे हैं। लाल धान की खेती न केवल रवांई क्षेत्र की आर्थिक मजबूती का आधार है, बल्कि यह यहां की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कृषि ज्ञान का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है।
रामा सिराई और कमल सिराई में इन दिनों चल रही धान की रोपाई उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, सामूहिक श्रम, प्रकृति के प्रति सम्मान और पारंपरिक खेती की जीवंत मिसाल प्रस्तुत कर रही है।

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