एमएसपी पर खरीद के लिए केंद्र को भेजा जाएगा प्रस्ताव, उत्पादकता 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक बढ़ाने पर जोर
देहरादून। प्रदेश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय सभागार में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में भारत सरकार की दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से संबंधित परियोजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में प्रदेश में दलहन का उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता एवं गुणवत्ता में सुधार करने तथा किसानों को बेहतर और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
एमएसपी पर खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजने के निर्देश
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में उत्पादित दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर नैफेड एवं एनसीडीसी के माध्यम से खरीद किए जाने का प्रस्ताव तैयार कर भारत सरकार को भेजा जाए और आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, ताकि दलहन उत्पादन के प्रति किसानों का रुझान बढ़े।
किसान उत्पादक संगठनों को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्य सचिव ने किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सेल गठित करने तथा इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि संगठित किसान समूहों के माध्यम से उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
12 कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता का लक्ष्य
बैठक में दलहन की उत्पादकता एवं गुणवत्ता को बढ़ाकर 12 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक ले जाने पर भी जोर दिया गया। इसके लिए उन्नत बीज, बेहतर कृषि तकनीक, फसल प्रदर्शन तथा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि दलहन उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि से प्रदेश में प्रोटीन की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ स्वस्थ एवं सक्षम मानव संसाधन के निर्माण में भी सहायता मिलेगी।
2025-26 से 2030-31 तक चलेगी परियोजना
कृषि एवं संबंधित विभागों ने बैठक में जानकारी दी कि भारत सरकार की यह परियोजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित की जाएगी। इसके तहत उत्तराखंड के लिए कार्ययोजना तैयार कर केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है।
परियोजना के अंतर्गत उड़द, अरहर और मसूर को प्रमुख दलहन फसलों के रूप में चयनित किया गया है। योजना के तहत बीज उत्पादन, फसल प्रदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और उन्नत कृषि तकनीकों से किसानों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा प्रदेश में दलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन के साथ किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को केंद्र सरकार की इस महत्वपूर्ण परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा दलहन उत्पादन में प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सभी संभावित प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान आनंद श्रीवास्तव, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. कश्यप सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
